MP News: इस कोर्ट में फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा की कहानी आई सामने, अदालत के भरोसे के बाद एक हुआ बिखरा परिवार

MP News:  टायलेट को लेकर बेहद चर्चित और सराही गई फिल्म "टायलेट एक प्रेमकथा "जैसी हकीकत मध्य प्रदेश के लोक अदालत में देखने को मिली है।

MP News: इस कोर्ट में फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा की कहानी आई सामने, अदालत के भरोसे के बाद एक हुआ बिखरा परिवार

MP News:  टायलेट को लेकर बेहद चर्चित और सराही गई फिल्म "टायलेट एक प्रेमकथा " (film "Toilet: Ek Prem Katha") जैसी हकीकत मध्य प्रदेश के लोक अदालत में देखने को मिली है।

मध्यप्रदेश में आज 14 सितम्बर को आयोजित की राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat ) में भी ऐसा मामला सामने आया।

प्रदेश में मंदसौर ( Mandsaur district ) जिले में आयोजित लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय गंगा चरण दुबे की बेंच क्र. 18 में चर्चित फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा जैसी कहानी देखने को मिली।

कोर्ट की बीच-बचाव से पति का पिता, बहु के लिए घर में टॉयलेट बनाने को तैयार हुआ और परिवार बिखरने से बच गया।

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क्या था पूरा मामला

मामला यह था कि नसरीन का निकाह जुवेद अहमद (परिवर्तित नाम) के साथ दिनांक 26.04.2019 को दावतखेड़ी में 51,786/- रुपये मेहर के साथ तय हुआ, कुछ समय पश्चात् नसरीन ने अपने पति व उसके परिजनों पर आक्षेप किया कि वे उसे मारपीट कर प्रताड़ित करते है, एक लाख रुपये दहेज मांगते हैं, उसकी ससुराल में देखभाल नहीं होती है, डिलेवरी उपरांत उत्पन्न पुत्र की सही देखभाल न होने के कारण मृत्यु हो गई, पति की मां, ससुर, पांच नन्दों के द्वारा सामुहिक मारपीट कर प्रताड़ना की जाती है।

इस क्रूरता के कारण उसने दिनांक 14 मई 2023 को घर छोड़ दिया। अनावेदक एवं उसके परिजनों ने कहा कि एक लाख रुपये लिए बिना मत आना, इस पर नसरीन ने अपने परिजनों के विरुद्ध मुकदमें दायर किए और स्वयं के भरण-पोषण दिलाए जाने की मांग की।

ये था असल विवाद

परिवार न्यायालय में मामला पहुंचने पर जब  गंगाचरण दुबे, प्रधान न्यायाधीश ने पक्षकारों के बीच  समझौता कार्यवाही किया, तो सच्चाई पता चला कि विवाद कुछ और ही था।

जुवैद की पांच बहनें, नसरीन के जेठ और उनकी पत्नी तथा माता-पिता संयुक्त परिवार में रहते हैं तथा उनके घर में टॉयलेट नहीं है।

जिससे घर की महिलाओं को शौच हेतु लगभग एक किलोमीटर दूरी तक जाना होता है। समस्या ज्ञात होते ही न्यायालय द्वारा परामर्श दिए जाने पर जुवैद के पिता टॉयलेट बनाने को तैयार हो गए और दो महीने के भीतर उन्होंने टॉयलेट निर्माण करने हेतु न्यायालय को लिखित आश्वासन दिया।

अदालत के हस्तक्षेप से एक हुआ परिवार

इस पर वर्षों से नसरीन, जुवैद के साथ संयुक्त परिवार को वापस हुए। मामले में नसरीन की ओर से अनवर अहमद और जुवैद की ओर से शेरू मंसूरी अधिवक्ताओं ने न्यायमित्र के रूप में तथा शुभम जैन, अधिवक्ता ने खण्डपीठ के सुलहकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की।

एक स्कूटी से सुलझा पारिवारिक विवाद

इसी राष्ट्रीय लोक अदालत में एक मामले में स्कूटी ने पति-पत्नी को मिलाया। पति ने रूठी हुई पत्नी को उसकी पसंदीदा पर्पल स्कूटी पर घुमाया और वाहन का नामांतरण पत्नी के नाम कराया। इसके बाद नाराज होकर घर छोड़कर गई पत्नी पति के साथ जाने को राजी हो गई।

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