MP Melioidosis Alert: मेलियोइडोसिस को लेकर MP में अलर्ट जारी, 40% है मत्यु दर, दूसरे राज्यों में भी पसार रहा पैर

MP Melioidosis Disease Alert: मध्यप्रदेश में NHM ने मेलियोइडोसिस अलर्ट जारी किया, मिट्टी-पानी से फैलता रोग, जानलेवा, समय पर इलाज जरूरी।

MP Melioidosis Alert: मेलियोइडोसिस को लेकर MP में अलर्ट जारी, 40% है मत्यु दर, दूसरे राज्यों में भी पसार रहा पैर

हाइलाइट्स

  • मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस का अलर्ट

  • मिट्टी और पानी से फैलता जानलेवा रोग

  • गलत इलाज से 40% मरीजों की हो रही मौत

MP Melioidosis Alert: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने मेलियोइडोसिस (Melioidosis) को लेकर अलर्ट जारी किया है। यह संक्रामक बीमारी मिट्टी और दूषित पानी में पाए जाने वाले बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमेलाई (Burkholderia pseudomallei) बैक्टीरिया से फैलती है। बरसात और नमी के मौसम में इसके संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रोग खासतौर पर डायबिटीज, किडनी के मरीज और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य और कृषि विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मेलियोइडोसिस को उभरती हुई उपेक्षित बीमारियों (Emerging Neglected Diseases) की सूची में शामिल किया है। दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा इसके नए हॉटस्पॉट बनते दिख रहे हैं।

[caption id="" align="alignnone" width="1242"]publive-image मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य और कृषि विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।[/caption]

क्या कहती है एम्स भोपाल की रिपोर्ट

एम्स भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह सालों में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों से 130 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। यह बीमारी अब स्थानिक (Endemic) रूप ले चुकी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मेलियोइडोसिस से पीड़ित हर 10 मरीजों में लगभग 4 की मौत हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसके लक्षण अक्सर टीबी (Tuberculosis) जैसी बीमारी के समान दिखाई देते हैं, जिससे मरीजों को गलत इलाज (Wrong Treatment) मिलता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है।

[caption id="" align="alignnone" width="1573"]publive-image AIIMS Bhopal[/caption]

हाल ही में सामने आए 14 नए केस

एम्स भोपाल ने 2023 से अब तक चार विशेष प्रशिक्षण (Special Training) आयोजित किए हैं, जिसमें 50 से अधिक चिकित्सक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट (Microbiologists) को प्रशिक्षित किया गया। हाल ही में 14 नए केस जीएमसी भोपाल, बीएमएचआरसी, जेके हॉस्पिटल, सागर और इंदौर से सामने आए। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सकों की पहचान क्षमता बढ़ने से ही अब ज्यादा केस रिपोर्ट हो रहे हैं।

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क्या है बीमारी के लक्षण

मेलियोइडोसिस के मुख्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार और सेप्सिस (Blood Infection), कम्युनिटी-एक्वायर्ड न्यूमोनिया (Community-acquired Pneumonia), त्वचा और मुलायम ऊतक (Soft Tissue) में संक्रमण, लिवर, प्लीहा, प्रोस्टेट या पैरोटिड ग्रंथि में गहरे फोड़े (Abscess), हड्डियों और जोड़ों का संक्रमण (Osteomyelitis, Septic Arthritis) शामिल हैं। लंबे समय तक यह टीबी जैसा दिख सकता है- वजन घटना, खांसी, बुखार और फेफड़ों में संक्रमण।

एम्स ने सलाह दी है कि यदि किसी को 2–3 हफ्तों से अधिक बुखार है, एंटी-टीबी दवा से लाभ नहीं हो रहा या बार-बार फोड़े बन रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से मेलियोइडोसिस की जांच करवाएं। यही सावधानी जीवन बचा सकती है।

मुख्य लक्षण

लक्षणसरल समझ
अचानक तेज बुखारबिना कारण तेज बुखार आना
सेप्सिस (खून में इन्फेक्शन)पूरे शरीर में इन्फेक्शन के लक्षण, बहुत कमजोरी
कम्युनिटी-अक्वायर्ड न्यूमोनियाखांसी, सांस लेने में दिक्कत, छाती में दर्द
त्वचा/मुलायम ऊतक का इन्फेक्शनत्वचा पर लाल सूजन, दर्द, पस बनना
अंदरूनी फोड़े (लिवर, प्लीहा, प्रोस्टेट, पैरोटिड)पेट/गर्दन में दर्द या सूजन, बुखार के साथ फोड़े
हड्डी और जोड़ का इन्फेक्शनहड्डी/जोड़ में तेज दर्द, सूजन, चलने में दिक्कत
लंबे समय तक टीबी जैसे लक्षणवजन घटना, खांसी, बुखार, फेफड़ों में इन्फेक्शन

कब डॉक्टर को दिखाएं (एम्स की सलाह)

स्थितिक्या करें
2–3 हफ्तों से ज्यादा बुखारतुरंत विशेषज्ञ से जांच करवाएं
एंटी-टीबी दवा से फायदा नहींमेलियोइडोसिस की जांच कराएं
बार-बार फोड़े बननाडॉक्टर से मिलकर टेस्ट करवाएं
लगातार खांसी, वजन घटना, बुखारटीबी जैसे दिखने पर भी मेलियोइडोसिस की जांच कराएं

कैसे होती है रोग की पुष्टि

रोग की पुष्टि खून, पस, थूक, यूरिन या सीएसएफ (Cerebrospinal Fluid) के सैंपल से की जाती है। इसके लिए ब्लड एगर (Blood Agar), मैककॉनकी (MacConkey) या ऐशडाउन मीडियम (Ashdown Medium) पर कल्चर टेस्ट किया जाता है। माइक्रोस्कोप (Microscope) में सुरक्षा-पिन जैसे धब्बे (Safety-pin Staining) देखे जाते हैं। यह बैक्टीरिया ऑक्सीडेज पॉजिटिव (Oxidase Positive) और अमिनोग्लाइकोसाइड/पोलिमिक्सिन रेसिस्टेंट (Aminoglycosides/Polymyxin Resistant) होता है। जहां संभव हो, पीसीआर (PCR Test) से भी पुष्टि की जाती है।

तो फिर बचाव के उपाय क्या हैं

एम्स और NHM ने कुछ सावधानियों की भी जानकारी दी है। खेतों में काम करते समय जूते और दस्ताने पहनना जरूरी है। खुले घावों को मिट्टी और पानी से बचाएं। संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं और समय पर एंटीबायोटिक उपचार (Antibiotic Treatment) शुरू करें। डॉक्टर द्वारा बताए गए कोर्स का पालन जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, धान के खेतों में काम करने वाले किसान, डायबिटीज (Diabetes) के मरीज और अत्यधिक शराब (Alcohol) सेवन करने वाले व्यक्ति इस संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील हैं। भोपाल, सागर, रतलाम और इंदौर से सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं।

बचाव के उपाय

सावधानीक्या करें
खेत में सुरक्षाजूते और दस्ताने पहनकर काम करें
घाव की सुरक्षाखुले घाव को मिट्टी और पानी से दूर रखें, साफ और ढका रखें
लक्षण पर कार्रवाईसंदिग्ध लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करवाएँ
इलाज की शुरुआतडॉक्टर की सलाह पर समय से एंटीबायोटिक उपचार शुरू करें
दवा का कोर्सडॉक्टर द्वारा बताया गया पूरा कोर्स समय पर पूरा करें

किसे ज्यादा खतरा

समूहकारण/नोट
धान के खेत में काम करने वाले किसानमिट्टी और रुके पानी से संपर्क ज्यादा
डायबिटीज के मरीजप्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है
अत्यधिक शराब पीने वालेइम्युनिटी और अंगों पर असर
प्रभावित जिलेभोपाल, सागर, रतलाम, इंदौर

कितनी गंभीर है यह बीमारी

मेलियोइडोसिस मिट्टी और दूषित पानी में पनपता है। संक्रमण मुख्यतः त्वचा के जख्मों, दूषित पानी के संपर्क और साँस के जरिए होता है। यदि समय पर पता न चले तो यह शरीर के कई अंगों में फोड़े, फेफड़ों में संक्रमण और सेप्सिस का कारण बनता है। वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार मृत्यु दर 40% तक हो सकती है। विशेषज्ञ बार-बार यह चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक बुखार या टीबी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

FAQs

1. मेलियोइडोसिस क्या है और कैसे फैलता है?
मेलियोइडोसिस (Melioidosis) एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मिट्टी और दूषित पानी में पाए जाने वाले बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमेलाई बैक्टीरिया (Burkholderia pseudomallei) से फैलती है। संक्रमण त्वचा के जख्म, दूषित पानी के संपर्क और सांस के जरिए होता है।

2. इस रोग के प्रमुख लक्षण कौन-कौन से हैं?
इस बीमारी में अचानक तेज बुखार, सेप्सिस (Blood Infection), फेफड़ों में संक्रमण (Pneumonia), त्वचा और मुलायम ऊतक में फोड़े (Soft Tissue Abscess), हड्डियों और जोड़ों में संक्रमण और लंबे समय तक टीबी जैसे लक्षण शामिल हैं। यदि समय पर सही इलाज न हो तो मृत्यु दर 40% तक हो सकती है।

3. बचाव और समय पर इलाज कैसे संभव है?
खेतों में काम करते समय जूते-दस्ताने पहनें, खुले घाव को मिट्टी-पानी से बचाएं। 2–3 हफ्ते से अधिक बुखार या बार-बार फोड़े बनना दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से मेलियोइडोसिस की जांच कराएं। रक्त, पस, थूक, यूरिन या सीएसएफ के सैंपल से कल्चर और PCR टेस्ट से रोग की पुष्टि की जा सकती है। डॉक्टर द्वारा बताए गए एंटीबायोटिक कोर्स का पालन जीवनरक्षक है।

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