डॉक्टर बंधुआ मजदूर की तरह नहीं: हाईकोर्ट ने MP सरकार से कहा-तत्काल मेडिकल छात्रों क दस्तावेज लौटाए

Madhya Pradesh MBBS Students Rural Service Mandatory Case: मध्यप्रदश हाईकोर्ट ने मेडिकल छात्रों के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। जिसमें कोर्ट ने कहा, डॉक्टरों से बंधुआ मजदूर की तरह काम नहीं कराया जा सकता है।

MP MBBS Students

हाइलाइट्स

  • मेडिकल छात्रों के मामले में अहम फैसला
  • हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया
  • राज्य सरकार दस्तावेज  तुरंत लौटाए

MP MBBS Students: मध्यप्रदश हाईकोर्ट ने मेडिकल छात्रों के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। जिसमें कोर्ट ने कहा, डॉक्टरों से बंधुआ मजदूर की तरह काम नहीं कराया जा सकता है। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि मेडिकल छात्रों के सभी दस्तावेज तुरंत वापस किए जाएं।

जानकारी के मुताबिक, मेडिकल छात्रों ने ग्रामीण क्षेत्रों में 5 साल सेवा देने की अनिवार्यता को चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की और फैसला सुनाया।

चिरायु मेडिकल कॉलेज के इन छात्रों से जुड़ा है मामला

चिरायु मेडिकल कॉलेज, भोपाल से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले डॉक्टर वैभव दुबे, पुष्पेंद्र सिंह और पुलकित शर्मा ने सीनियर एडवोकेट आदित्य संघी के माध्यम से अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इन छात्रों से 5 साल तक ग्रामीण इलाकों में सेवा देने का एक बांड भरा गया था, जिसमें यह शर्त थी कि अगर सेवा नहीं दी गई तो 50 लाख रुपए की राशि जमा करनी होगी।

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छात्रों पर दबाव डालना अनुचित

सीनियर वकील ने कहा कि यह बंधन गलत है। यह मुद्दा पहले भी लोकसभा में उठ चुका है। ग्रामीण इलाकों में सेवा देना एक व्यवस्था का मामला हो सकता है, लेकिन किसी पर इसे जबरदस्ती लागू करना सही नहीं है। इसके अलावा, 50 लाख रुपए की गारंटी राशि की शर्त भी छात्रों पर अनुचित दबाव डालती है। कोर्ट ने इन बातों पर गौर करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि छात्रों के जमा किए गए दस्तावेज तुरंत वापस किए जाएं, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो।

पन्ना, छतरपुर, दमोह के 67 गांवों का जोनल मास्टर प्लान: टाइगर रिजर्व के इको सेंसिटिव जोन की 11 महीने बाद हुई पहली बैठक

Panna Tiger Reserve

Panna Tiger Reserve: मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के इको सेंसिटिव जोन (Eco Sensitive Zone)  में पन्ना, छतरपुर और दमोह जिलों के 67 गांवों के लिए एक जोनल मास्टर प्लान बनाया जाएगा। यह काम एक साल में पूरा होगा। टाइगर रिजर्व इको सेंसिटिव जोन घोषित होने के 11 महीने बाद हुई पहली बैठक में यह तय किया गया कि प्रस्तावित जोन में लैंड यूज एरिया की स्थिति को स्पष्ट किया जाएगा। इसमें सभी प्रकार की व्यवसायिक खनन गतिविधियों पर रोक और नए उद्योगों की स्थापना पर भी पाबंदी रहेगी। नेशनल पार्क के एक किलोमीटर के दायरे में ही होटल और रिसॉर्ट चलाए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

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