MP Lumpy Virus: सीएम ने कहा- पशुओं की मृत्यु हल्के में ना लें, टोल फ्री नम्बर जारी

MP Lumpy Virus: सीएम ने कहा- पशुओं की मृत्यु हल्के में ना लें, टोल फ्री नम्बर जारी

MP Lumpy Virus

भोपाल। प्रदेश में फैले लंपी वायरस से गायें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री ने वायरस के नियंत्रण के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में पशुपालन मंत्री  प्रेम सिंह पटेल सहित मुख्यसचिव व पशु पालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं और अन्य स्थान पर रहने वाले पशुओं की रोग से रक्षा के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है। जिस तरह COVID-19 से मिलकर सभी लड़े थे वैसा ही जागरूकता का वातावरण गांव-गांव में बनना चाहिए। मवेशियों को इस संक्रामक रोग से बचाने के लिए ग्राम सभाओं में चर्चा हो। रोग से बचाव के उपाय बताएं जाए और प्रत्येक स्तर पर आवश्यक सतर्कता बरती जाए।

रोग की जानकारी न छिपाएं

कम संख्या में रोग से पशुओं की मृत्यु को हल्के में ना लें और रोग की जानकारी न छिपाएं। सभी आवश्यक उपायों को अमल में लाया जाए। संचार माध्यमों का प्रयोग करें। विभागीय अमले को सेंसटाइज करें। प्रतिदिन रिपोर्ट दें। टीकाकरण पर जोर रहे। भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्य किया जाए। गौ-माता की सेवा और संरक्षण हमारी प्राथमिकता है। प्रदेश में लंपी वायरस के नियंत्रण हेतु गौ-सेवक, जनप्रतिनिधि और समाज के अन्य लोगों के साथ मिलकर हम हरसंभव उपाय करेंगे।

हम यह लड़ाई भी जीतेंगे

सीएम ने बताया कि आज मैंने उच्चस्तरीय बैठक में गहन चर्चा की। मुझे विश्वास है कि ‘COVID-19’ की भांति हम यह लड़ाई भी जीतेंगे। गाय के महत्व को देखते हुए सनातन संस्कृति में ‘मां’ कहा गया है। यह हमें केवल दुग्ध, घृत, मक्खन ही नहीं देती है, अपितु स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि भी प्रदान करती हैं। गौ-माता का नाम लेने मात्र से पुण्य प्राप्त होता है। जिस घर-आंगन में गौ-माता होंगी, निश्चय ही वहां देव कृपा बरसेगी।

नियंत्रण कक्ष के साथ टोल फ्री नम्बर

मुख्यमंत्री ने गौशालाओं और अन्य स्थान पर रहने वाले पशुओं की रोग से रक्षा के लिए अधिकारियों को विस्तृत निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर भोपाल में राज्य स्तरीय रोग नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। भोपाल में स्थापित नियंत्रण कक्ष का दूरभाष क्रमांक- 0755-2767583 व टोल फ्री नंबर 1962 है। इन नम्बरों पर चर्चा कर पशु पालकों द्वारा आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लम्पी वायरस के नियंत्रण के लिए संचार माध्यमों का उपयोग करें।

प्रदेश में स्थिति

पशुपालन विभाग द्वारा प्रदेश में लम्पी रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अलर्ट जारी कर विशेष सतर्कता रखी जा रही है। संक्रमित क्षेत्रों तथा जिलों में पशुओं का सघन टीकाकरण तथा चिकित्सा कार्य किया जा रहा है। पशुओं में लम्पी स्किन रोग के लक्षण दिखाई देने पर निकटतम पशु औषधालय और पशु चिकित्सालय में संपर्क स्थापित करने को कहा गया है। बताया गया कि प्रदेश के जिलों में वायरस से 7686 पशु प्रभावित हुए, जिसमें 5432 पशु ठीक हुए हैं। अभी तक 101 पशुओं की मृत्यु हुई है। प्रदेश के सात जिलों रतलाम, उज्जैन, मंदसौर, नीमच, बैतूल, इन्दौर और खण्डवा में रोग की पुष्टि हुई है। प्रभावित ग्रामों और जिलों में पशुओं के आवागमन को प्रतिबंधित करने, बीमारी के नमूने, तत्काल राज्य पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला भोपाल जहां से रोग के आउट ब्रेक होने की पुष्टि होती है, उससे 5 किलोमीटर की परिधि में आवश्यक टीकाकरण किया जा रहा है। औषधियाँ और वैक्सीन खरीदने के लिए पशु कल्याण समिति से व्यवस्था की गई है। राजस्थान और गुजरात की सीमा से लगे जिलों अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच, राजगढ़ और बुरहानपुर के पशुपालन विभाग के अमले को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्र की पशु चिकित्सा संस्थाओं में पदस्थ पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों को दायित्व दिए गए हैं। सतत् निगरानी रखी जा रही है। जुलाई माह से वेबिनार, बैठक और राज्य स्तरीय युवा संवाद कर सभी संभागों के पशुपालन विभाग के संयुक्त संचालक, उप संचालक, संभागीय लेब प्रभारी और विशेषज्ञों के माध्यम से चर्चा कर आवश्यक उपाय अमल में लाए जा रहे हैं। विभाग के सभी अधिकारियों को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश

– लम्पी वायरस को गंभीरता से लें। यह संक्रामक रोग है और गंभीर है। इसे हल्के में नहीं लेना है। हमारा कर्त्तव्य है कि इसे खत्म करें।

– वायरस के नियंत्रण के लिए आवश्यक उपायों की जानकारी पशुपालकों को दें, ग्राम सभा बुलाकर भी सूचित करें।

– गौ-शालाओं की गायों का टीकाकरण हो। अन्य पशुओं का भी टीकाकरण किया जाए।

– संक्रमित पशुओं के ग्रामों से अन्य स्थानों पर पशुओं का आवागमन प्रतिबंधित करें।

– रोग का विस्तार न हो, इसके लिए पूरी सावधानियां बरती जाएं।

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