दमोह में काम नहीं आया 'बिकाऊ-टिकाऊ' का मुद्दा: तरवर Vs राहुल की लड़ाई में BJP को मिला लोधी वोटर्स का साथ

MP Lok Sabha Result 2024: दमोह में काम नहीं आया 'बिकाऊ-टिकाऊ' का मुद्दा: तरवर Vs राहुल की लड़ाई में BJP को मिला लोधी वोटर्स का साथ

दमोह में काम नहीं आया 'बिकाऊ-टिकाऊ' का मुद्दा: तरवर Vs राहुल की लड़ाई में BJP को मिला लोधी वोटर्स का साथ

हाइलाइट्स

  • दमोह में काम नहीं आया 'बिकाऊ-टिकाऊ' का मुद्दा
  • तरवर Vs राहुल की लड़ाई में BJP को मिला लोधी वोटर्स का साथ
  • 40 लाख 6 हजार से राहुल लोधी ने की जीत हासिल

MP Lok Sabha Result 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में दमोह लोकसभा सीट पर फिर एक बार बीजेपी ने बाजी मार ली है। बीजेपी प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी ने 4 लाख 64 हजार वोटों से जीत हासिल की है

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दमोह लोकसभा सीट (MP Lok Sabha Result 2024) इस बार के चुनाव में चर्चा का विषय बनी रही। इस सीट पर मध्यप्रदेश के दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। दमोह लोकसभा सीट पर कुल 65.80% मतदान हुआ था।

बीजेपी प्रत्याशी

बीजेपी ने लोधी समाज को साधने के लिए राहुल सिंह लोधी को उम्मीदवार बनाया था। राहुल सिंह लोधी दमोह विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। तब वे कांग्रेस में थे।

2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा था। जिसमें उन्होंने बीजेपी के जयंत मलैया को करीबी मुकाबले में 798 वोटों से हराया था।

इसके बाद 2020 में वे बीजेपी में शामिल हुए। हलांकि 2023 विधानसभा में उन्हें बीजेपी ने टिकट नहीं दिया था।

कांग्रेस प्रत्याशी

दमोह सीट से कांग्रेस ने बंडा सीट से पूर्व विधायक रहे तरवर सिंह लोधी पर भरोसा जताया था। तरवर सिंह लोधी को भी दमोह के लोधी वोटर्स को साधने के लिए कांग्रेस ने दाव लगाया है।

तरवर सिंह लोधी का राजनीतिक सफर सरपंच के तौर पर शुरू हुआ था। 2015 में वे जिला पंचायत सदस्य बने। इसके बाद उन्हें 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बने।

तब उन्होंने बीजेपी के हरवंश राठौर को 25 हजार वोटों से हराया था। इसके बाद 2023 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के वीरेंद्र लोधी से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार वे पहली बार सांसद का चुनाव लड़े।

दमोह सीट का राजनीतिक इतिहास

1962 में यहां पहली बार चुनाव हुआ था। तब कांग्रेस ने यहां कब्जा जमाया था. कांग्रेस ने पांच चुनावों 962,1967, 1971,1980 और 1984 में इस सीट पर जीत हासिल की।

1989 में बीजेपी के लोकेंद्र सिंह ने कांग्रेस से ये सीट छीन ली। तब से ये सीट बीजेपी के कब्जे में रही। 1991 से 1999 तक रामकृष्ण कुसमरिया, 2004 में चंद्रभान भैया, 2009 में शिवराज लोधी, 2014 और 2019 में प्रहलाद पटेल को यहां से जीत मिली।

2014 के चुनाव में प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस के महेंद्र प्रताप सिंह को हराया। वहीं 2019 के चुनाव में फिर से एक बार प्रहलाद पटेल ने प्रताप सिंह लोधी को हराया।

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