CM मोहन यादव का बड़ा बयान: MP के इन इलाकों में होगी शराबबंदी, मुख्यमंत्री बोले- जल्द ही फैसला लेंगे

MP Liqueur Ban: मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरों में शराब बंदी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। CM मोहन यादव ने इस मुद्दे पर एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।

MP Liqueur Ban

MP Liqueur Ban News: मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरों में शराब बंदी की संभावना पर विचार किया जा रहा है। CM मोहन यादव ने इस मुद्दे पर एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही इस संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकता है।

नर्मदा से सटे इलाकों में पहले ही है शराबबंदी

नर्मदा नदी से सटे हुए इलाकों में पहले ही शराबबंदी लागू है, सरकार ये निर्णय लेती है तो मध्य प्रदेश के धार्मिक शहरों में शराबबंदी लागू होगी। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर, राजाराम सरकार का प्रसिद्ध मंदिर वाला शहर ओरछा, दतिया में पीतांबरा पीठ, माता शारदा मंदिर वाले मैहर जैसे शहरों में शराबबंदी लागू की जा सकती है। साधु, संतों और लोगों के सुझाव मिलने के बाद सरकार आगामी फाइनेंशियल ईयर (1 अप्रैल, 2025) से धार्मिक नगरियों में शराबबंदी लागू कर सकती है।

कई संतों और धार्मिक नेताओं ने दिया है सुझाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि कई संतों और धार्मिक नेताओं ने इस विषय पर सुझाव दिए हैं। संतों का मानना है कि धार्मिक नगरों में शराब की बिक्री और सेवन से वहां की पवित्रता और संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा, 'हमारी सरकार इस सुझाव (MP Liqueur Ban) को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही इस पर निर्णय लेने की योजना बना रही है।'

जल्द होगी आधिकारिक घोषणा

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद धार्मिक नगरों में शराब बंदी को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। धार्मिक संगठनों और समाज के कई वर्गों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। वहीं, कुछ व्यावसायिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। सरकार द्वारा इस दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

पहले भी लिया गया था ऐसा फैसला

बता दें, इससे पहले भी सितम्बर 2024 में सीएम मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए, नर्मदा नदी के किनारे स्थित शहरों और धार्मिक स्थलों के आसपास मांस और शराब के सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

मोहन यादव ने नर्मदा नदी की सांस्कृतिक और धार्मिक अखंडता को बनाए रखने को लिए यह फैसला लिया था। तब उन्होंने राज्य प्रशासन को आदेश दिया था कि नदी के पवित्र स्थलों के पास कोई भी मांस और शराब की बिक्री न हो ताकि नर्मदा की सांस्कृतिक विरासत और पवित्रता बनी रहे।

कांग्रेस ने बताया स्टंटबाजी

हालांकि मोहन यादव के ऐलान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने पहले नर्मदा के किनारे बसे शहरों में शराबबंदी की घोषणा की थी, लेकिन वहां खुलेआम शराब बिक रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 1 साल से अपने शहर उज्जैन में शराबबंदी नहीं कर पाए, मुख्यमंत्री केवल हवा में तीर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री को हेडलाइन बनाने का शौक है।

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