Jhabua Superstition: अंधविश्वास की हदें पार... निमोनिया पीड़ित 3 मासूम बच्चों को गर्म सलाखों से दागा, PICU में भर्ती

मध्य प्रदेश के झाबुआ में अंधविश्वास में फंसे लोगों ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। तीन मासूम बच्चों को निमोनिया होने पर इलाज की बजाय गर्म सलाखों से दाग दिया गया। फिलहाल बच्चे PICU में भर्ती हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच तेज कर दी है।

Jhabua Superstition: अंधविश्वास की हदें पार... निमोनिया पीड़ित 3 मासूम बच्चों को गर्म सलाखों से दागा, PICU में भर्ती

हाइलाइट्स

  • झाबुआ में तीन मासूम बच्चों को गर्म सलाखों से दागा।
  • तांत्रिक के कहने पर परिजन ने गर्म सलाखों से दावा।
  • हालत नाजुक, अस्पताल में O2 सपोर्ट पर तीनों बच्चे।

Jhabua Superstition Children Pneumonia Case : मध्य प्रदेश के झाबुआ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। यहां तीन मासूम बच्चे, जिनकी उम्र महज दो से छह महीने है, अपने ही परिजनों के अंधविश्वास का शिकार बन गए। इन मासूम बच्चों को निमोनिया होने पर इलाज के लिए अस्पताल की बजाय तांत्रिक के पास ले जाया गया। अंधविश्वास के शिकंजे में फंसे परिजनों ने तांत्रिक के कहने पर बच्चों को गर्म सलाखों से दाग दिया, जिससे उनके शरीर पर झुलसने के निशान बन गए। अब मामले में सीनियर डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तीनों की हालत नाजुक, बच्चे PICU में भर्ती

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में अंधविश्वास की भयावह घटना सामने आई है, जहां निमोनिया से पीड़ित तीन मासूम बच्चों को इलाज कराने की बजाय गर्म सलाखों से दाग दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इनमें से दो बच्चों की उम्र सिर्फ दो महीने है, जब बच्चों की हालत बिगड़ गई तो उन्हें झाबुआ जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बिना देरी किए PICU (पीडियाट्रिक ICU) में भर्ती किया। बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है, और डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। अंधविश्वास की भेंट चढ़े तीनों मासूम अब जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के शरीर पर दागने के ताजा निशान हैं और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

गांवों में अब भी ज़िंदा है यह कुप्रथा

बच्चों की जान से खिलवाड़ की यह कुप्रथा झाबुआ के पिटोल, कल्याणपुरा, राणापुर और सनोड़ जैसे गांवों में आज भी देखी जा सकती है। जहां तांत्रिक निमोनिया या अन्य बीमारियों को ठीक करने के नाम पर बच्चों को दागते हैं। या उनके माता-पिता या अन्य परिजन। इस ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बीमार बच्चों की इलाज अंधविश्वास में पड़ कर किया जाता है। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचने के बावजूद जागरूकता की कमी से बच्चों की जान खतरे में पड़ रही है।

डॉक्टर की चेतावनी-इलाज विज्ञान से, तंत्र से नहीं

डॉ. संदीप चोपड़ा, पीडियाट्रिक ICU प्रभारी ने बताया कि दागने से बीमारी नहीं जाती, बल्कि संक्रमण और दर्द से हालत और बिगड़ती है। सांस की तकलीफ की वजह से बच्चा कम रोता है, जिससे परिजन भ्रमित हो जाते हैं कि बच्चा ठीक हो रहा है, जबकि वो अंदर से और कमजोर हो जाता है। हर माता-पिता को समझना होगा कि इलाज केवल डॉक्टरों और विज्ञान से ही संभव है, अंधविश्वास से नहीं।

तांत्रिक के कहने पर बच्चों से क्रुरता

नन्हीं सी तीन जान जो अभी अस्पताल में गंभीर हालत हालत में हैं। उन्हें इस मुसीबत में डालने वाले उसने परिवार वाले ही है। परिजनों ने बताया बच्चों के बीमार होने उन्होंने ऐसा किया है। गांव के एक तांत्रिक के कहने पर उन्होंने अपने ही बच्चों के शरीर पर गर्म सलाखों से दाग दिया।

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पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू

झाबुआ जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप चोपड़ा ने जब बच्चों के शरीर पर गर्म सलाखों से दागने के ताजा निशान देखे, तो उन्होंने बिना देरी किए इसकी जानकारी थाना प्रभारी को लिखित में दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया ने बताया कि पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उन्होंने बताया कि अंधविश्वास से जुड़ी ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2023 में भी झाबुआ में इसी प्रकार की एक दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई की थी। फिलहाल पुलिस घटना से जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

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