MP सूचना आयुक्त पर 40 हजार का जुर्माना: हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी एजेंट की तरह काम ना करें, 2 लाख की जानकारी मुफ्त दें

MP High Court News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) ने सूचना आयुक्त पर 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है और कहा कि वह सरकार के एजेंट के रूप में काम ना करें। आवेदक को दो लाख रुपए से ज्यादा की मांगी गई जानकारी मुफ्त देने के आदेश दिए।

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हाइलाइट्स

  • एमपी हाईकोर्ट ने सूचना आयुक्त पर लगाया जुर्माना
  • RTI में जानकारी देने अपील की थी खारिज
  • 2.12 लाख की जानकारी मुफ्त में देने के आदेश भी किए

MP High Court News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आरटीआई से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) ने सूचना आयुक्त पर 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही कहा कि वह सरकार के एजेंट के रूप में काम ना करें। इसी के साथ आवेदक को दो लाख रुपए से ज्यादा की मांगी गई जानकारी मुफ्त देने के आदेश दिए।

बता दें, भोपाल के फिल्ममेकर नीरज निगम ने 2019 में सूचना के अधिकार के तहत पशुपालन विभाग में पदस्थ अधिकारी आरके रोकड़े के बारे में जानकारी मांगी थी। संबंधित सूचना अधिकारी ने 30 दिन के अंदर चाही गई जानकारी नहीं दी।

सूचना आयुक्त ने बिना जांच अपील खारिज की थी

इसके बाद नियमानुसार फिल्ममेकर ने सूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर की थी। यहां से बिना जांच के ही अपील खारिज कर दी गई। बाद में फिल्ममेकर नीरज निगम ने फैसले को अगस्त 2023 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। गुरुवार, 6 मार्च 2025 को जस्टिस विवेक अग्रवाल की कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई।

RTI में 30 दिन में जानकारी देने का नियम

आरटीआई का नियम कहता है कि तीस दिन में आवेदक को चाही गई जानकारी दे दी जाए, पर 31 वें दिन विभाग के तरफ से नीरज निगम को पत्र लिखकर बताया गया कि, आपके द्वारा चाही गई जानकारी व्यापक है।

इसके लिए 2 लाख 12 हजार पन्नों में यह जानकारी मिलेगी। इसलिए 2 लाख 12 हजार रुपए जमा करने होंगे। अपीलकर्ता ने अपीलीय अधिकारी के समक्ष चुनौती देते हुए बताया गया कि चूंकि सूचना 30 दिन के अंदर नहीं दी गई है, इसलिए जानकारी फ्री आफ कास्ट उपलब्ध करवाई जाए।

कहा- पहले 2.12 लाख रुपए जमा करो

फिल्ममेकर नीरज के वकील दिनेश उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने 26 मार्च 2019 को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दिया था। सूचना अधिकारी ने जानकारी के एवज में 30 दिन बाद एक पत्र अपीलकर्ता को भेजा। इसमें लिखा था कि जानकारी चाहिए तो 2 लाख 12 हजार रुपए जमा करना होंगे। इसकी जानकारी नीरज निगम ने सूचना आयुक्त को भी दी थी।

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