Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी के क्रिमिनल केस 40 साल बाद भी लंबित, एमपी हाईकोर्ट ने कहा-देरी बर्दाश्त नहीं

भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े आपराधिक मामले दशकों से लंबित हैं। एमपी हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश देते हुए कहा कि हम केस को 40 साल तक लंबित नहीं रख सकते हैं।

Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी के क्रिमिनल केस 40 साल बाद भी लंबित, एमपी हाईकोर्ट ने कहा-देरी बर्दाश्त नहीं

हाइलाइट्स

  • भोपाल गैस त्रासदी पर एमपी हाईकोर्ट का बड़ा आदेश।
  • ट्रायल कोर्ट को आदेश, तेजी से करें केस का निराकरण।
  • कोर्ट ने कहा- 40 साल तक लंबित नहीं रख सकते मामले।

Bhopal Gas Tragedy Case Delay MP High Court Order: भोपाल गैस कांड के आपराधिक मामलों को लेकर सालों बीत जाने के बावजूद मुकदमे अब तक अनसुलझे हैं। इस गंभीर देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि चार दशकों तक मुकदमे लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों को अब प्राथमिकता के साथ जल्द से जल्द निपटाने की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने ट्रायल और जिला न्यायालयों को मासिक रिपोर्ट देने और मामलों को प्राथमिकता से सुनने का आदेश दिया।

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने बुधवार को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए कि 1984 की त्रासदी से जुड़े सभी लंबित केसों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि ट्रायल शुरू नहीं हो पाया क्योंकि चार्जशीट दाखिल नहीं हुई।

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भोपाल गैस त्रासदी, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष समिति की और से दाखिल जनहित याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने अहम निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि 1984 गैस त्रासदी से जुड़े सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई में अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

publive-image 40 साल तक लंबित नहीं रख सकते केस

कोर्ट ने भोपाल की ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया कि वह केस की हर महीने की प्रोग्रेस रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपे, जिसे आगे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सख्त लहजे में कहा— “हम 40 साल तक कोई मामला लंबित नहीं रख सकते।”

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क्रिमिनल केस का निराकरण तेजी से करें

इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वॉरेन एंडरसन सहित सभी आरोपियों के खिलाफ मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए कि गैस त्रासदी से जुड़े सभी आपराधिक मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए और जल्द सुनवाई पूरी की जाए। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि ट्रायल कोर्ट गैस त्रासदी से जुड़े क्रिमिनल केस का शीघ्र निराकरण करें।

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जनहित याचिका में क्या कहा गया है?

भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की ओर से जुलाई 2025 को जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश चंद ने बताया कि भोपाल की सीजेएम कोर्ट ने 7 जून 2010 को आरोपियों को सजा सुनाई थी। इसके बाद सभी आरोपियों ने सेशन कोर्ट में अपील प्रस्तुत की थी। वह अपील पिछले 15 सालों से अभी भी लंबित है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि यह मामला 5 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया है। वहीं शासन की ओर से दलील दी गई कि सीबीआई जाँच एजेंसी है और अब भी एक आपराधिक अपील और एक विविध आपराधिक मामला लंबित है। यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत आरोपियों को फरार घोषित करने के लिए दायर किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि आरोपी अक्टूबर 2023 से अदालत में उपस्थित हो रहा है, फिर भी अब तक कोई आदेश पारित नहीं हुआ है।

अब जल्द न्याय मिलने की उम्मीद

भोपाल गैस त्रासदी न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में गिनी जाती है। इस हादसे ने लाखों जिंदगियों को प्रभावित किया और हजारों लोगों की जान चली गई। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि चार दशक बाद भी पीड़ितों को पूरा न्याय नहीं मिल पाया है।

वर्षों से टाल-मटोल और कानूनी प्रक्रिया में देरी ने इस मामले को और भी पीड़ादायक बना दिया है। पीड़ित परिवार आज भी न्याय की आस में समय और सिस्टम से जूझ रहे हैं।

हालांकि, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का ताजा आदेश इस दिशा में एक नई किरण लेकर आया है। अदालत द्वारा दिए गए निर्देश से यह उम्मीद बंधी है कि अब दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और पीड़ितों को देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलेगा।

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