MP में उद्योगों को राहत: अब 33% तक ज्यादा निर्माण की अनुमति, फैक्ट्री के पीछे और साइड में जमीन छोड़ने की पाबंदी खत्म

MP Industrial FAR Update: मध्यप्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र जैसे मंडीदीप, गोविंदपुरा और पीथमपुर लंबे समय से जमीन की कमी से जूझ रहे हैं। यहां तक की नई यूनिट्स लगाने के लिए भी जमीन लगभग खत्म हो चुकी है।

MP में उद्योगों को राहत: अब 33% तक ज्यादा निर्माण की अनुमति, फैक्ट्री के पीछे और साइड में जमीन छोड़ने की पाबंदी खत्म

MP Industrial FAR Update: मध्यप्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र जैसे मंडीदीप, गोविंदपुरा और पीथमपुर लंबे समय से जमीन की कमी से जूझ रहे हैं। यहां तक की नई यूनिट्स लगाने के लिए भी जमीन लगभग खत्म हो चुकी है। इसी कारण से नए निवेशक दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं और पुराने उद्योग अपने प्लांट का विस्तार नहीं कर पा रहे। सरकार ने इस समस्या को देखते हुए अब भू-उपयोग (Land Use) नियमों में अहम छूट दी है। इससे उद्योगों को अपनी पहले से खरीदी हुई जमीन पर 33% तक अतिरिक्त निर्माण की सुविधा मिलेगी।

एफएआर (FAR) में बढ़ोतरी

[caption id="" align="alignnone" width="1033"]एफएआर (FAR) में बढ़ोतरी एफएआर (FAR) में बढ़ोतरी[/caption]

2012 के नियमों के अनुसार उद्योगों को 1.25 से 1.50 FAR की अनुमति थी। अब सरकार ने 0.25 से 0.50 तक अतिरिक्त FAR बढ़ा दिया है। इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है।

पीछे और साइड में खुली जगह रखने की बाध्यता खत्म

अब उद्योगों को प्लॉट के पीछे और बगल में खाली जगह छोड़ने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। हालांकि फ्रंट मार्जिन (MOS) में पहले की तरह ही भवन की ऊँचाई के आधे के बराबर ही दूरी रखनी होगी।

ज्यादा निर्माण का सीधा फायदा?

1500 sq.ft के प्लॉट पर अब 2250 की जगह 3000 sq.ft निर्माण पहले 1.50 FAR होने पर1500 sq.ft प्लॉट = 2250 sq.ft निर्माण। अब नए 2.0 FAR के साथ। वही प्लॉट = 3000 sq.ft निर्माण, यानी 750 sq.ft अतिरिक्त स्पेस, वो भी बिना नई जमीन खरीदे। मंडीदीप इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास मूंदड़ा का कहना है कि एक करोड़ की नई जमीन खरीदने की बजाय 30 लाख में मौजूदा प्लॉट में निर्माण कर लें तो 70 लाख की वर्किंग कैपिटल बच जाती है।”

किस आकार की जमीन पर कितना नया FAR मिलेगा?

जमीन का आकार (हेक्टेयर)पुराना FARनया FAR
0.045 – 0.101.251.50
0.10 – 21.001.25
0.15 (फ्लैटेड इंडस्ट्री)1.502.00

फैसला क्यों जरूरी था?

मंडीदीप में जमीन की कमी के कारण पतंजलि, जेबीएम समूह जैसी प्रमुख कंपनियां निवेश वापस ले गईं। HEG, वोल्वो-आयशर और प्रॉक्टर एंड गैम्बल जैसे बड़े उद्योगों ने नई यूनिट्स अन्य जगहों पर लगाई गई। इस लिए ये फैसला लेना जरुरी था। वहीं गोविंदपुरा में जमीन न होने से सिग्मा इंडस्ट्रीज, सुपर स्क्रीन, सैनफील्ड, टेस्ला इंडिया जैसी कंपनियां बाहर चली गईं।

सरकार का नजरिया

एमडी MPIDC चंद्रमौली शुक्ला ने कहा कि, पुराने नियमों में जमीन उपयोग बेहद सीमित था। सुधार का मकसद यह है कि उद्योग मौजूदा जमीन का अधिक उपयोग कर सकें। जब उद्योग कम जमीन में विस्तार करेंगे, तो नए निवेशकों के लिए और भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियाँ और निवेश दोनों बढ़ेंगे।

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