MP: कोरोना संकट के बीच रेमिडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ी मांग, जानिए क्या है इसकी खासियत ?

Remdesivir injection

भोपाल। मप्र में कोरोना वायरस एक बार फिर से कहर बरपा रहा है। ऐसे में सरकार अपने स्तर पर हर संभव उपाय कर रही है। अस्पतालों में व्यवस्थाओं को ठीक किया जा रहा है। साथ ही, 45 साल से ऊपर के लोगों को तेजी से टीका भी लगाया जा रहा है। लेकिन इस दौरान एक इंजेक्शन की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है। इस इंजेक्शन का नाम है रेमडेसिवीर। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस इंजेक्शन में ऐसा क्या है कि इसकी मांग इतनी बढ़ गई है।

गंभीर मरीजों के लिए कारगर है इंजेक्शन

गौरतलब है कि कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में एंटी वारल रेमडेसिवीर इंजेक्शन कारगर है। किसी भी गंभीर मरीज को ठीक करने के लिए इसके छह डोज लगते हैं। वहीं, इस इंजेक्शन की मांग बढ़ने के बाद बाजार में इसकी कीमत 4000 रुपये से लेकर 6000 रुपये तक हो गई है। कई जगहों पर तो इस इंजेक्शन का स्टॉक भी खत्म हो गया है।

इसका साइड इफेक्ट भी नहीं है

गंभीर मरीजों को पहले दिन इस इंजक्शन के दो डोज (200-200 मिलीग्राम) एक साथ लगाई जाती है। उसके बाद 100-100 एमजी के चार डोज लगाए जाते हैं। इसका असर भी कारगर है, इंजेक्शन के पहले डोज से ही मरीजों की स्थिति में सुधार होने लगता है। साथ ही इसका साइड इफेक्ट भी नहीं है। हालांकि डॉक्टर इंजेक्शन लगाने से पहले ये ध्यान रखते हैं कि मरीज का लिवर फंक्शन टेस्ट एवं किडनी फंक्शन टेक्ट नार्मल हो।

सबसे पहले ‘इबोला’ के इलाज में किया गया था इसका उपयोग

बतादें कि रेमडेसिवीर एक न्यूक्लियोसाइड राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) पोलीमरेज़ इनहिबिटर इंजेक्शन है। इसका उपयोग सबसे पहले वायरल रक्तस्रावी बुखार ‘इबोला’ के इलाज के लिए किया गया था। जिसे अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी गिलियड साइंसेज ने बनाया था। वहीं विश्व में कोरोना के प्रसार के बाद अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीज (NIAID) ने इस इंजेक्शन को कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में कारगर पाया। जिसके बाद से ही इसका उपयोग कोविड संक्रमित मरीजों के इलाज में किया जा रहा है।

ऐसे काम करती है रेमडेसिवीर

रेमडेसिवीर इंजेक्शन सीधे वायरस पर हमला करती है। इसे ‘न्यूक्लियोटाइड एनालॉग’ कहा जाता है जो एडेनोसिन की नकल करता है, जो RNA और DNA के चार बिल्डिंग ब्लॉक्स में से एक है। बतादें कि वायरस आमतौर पर तेजी से हमला करने की कोशिश करते हैं। लेकिन रेमडेसिवीर चुपके से एडेनोसिन के बजाय वायरस के जीनोम में खुद को शामिल करता है, जो रेप्लिकेशन प्रोसेस में शॉर्ट सर्किट की तरह काम करता है।

कितनी असरकारी है रेमडेसिवीर

1,000 से अधिक लोगों पर किए गए परीक्षण में बताया गया है कि सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना वायरस मरीज आम दवाईयों की तुलना में इससे जल्दी ठीक हो गए। वहीं इस दवा के उपयोग वाले मरीजों के ठीक होने की रफ्तार भी 31 प्रतिशत अधिक रही है।MP: कोरोना संकट के बीच रेमिडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ी मांग, जानिए क्या है इसकी खासियत ?

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