एमपी में बंद होंगे बार, राष्ट्रपति ने हुक्का बार प्रतिबंध बिल को दी मंजूरी

MP Hukka Bar Ban: एमपी में बंद होंगे हुक्का बार, राष्ट्रपति ने हुक्का बार प्रतिबंध बिल को दी मंजूरी

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भोपाल। MP Hookah Bar Ban : मध्यप्रदेश में अब हुक्का बार चलाने वालों की खैर नहीं। नशा मुक्ति उद्देश्य के तहत मध्यप्रदेश के तहत हुक्का बार प्रतिबंध के तहत राष्ट्रपति को भेजे गए बिल को मंजूरी दे दी गई है। दिसंबर 2022 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट में इस बिल को मंजूरी दी थी।

अगले हफ्ते जारी हो सकता है आदेश

एमपी में आज करीब 200 से ज्यादा हुक्का बार चलते हैं। जिसके इन हुक्का बार बंद होने का रास्ता साफा हो जाएगा। इसके लिए दिल्ली में राष्ट्रपति को मध्य प्रदेश से भेजे गए हुक्का बार प्रतिबंघ बिल को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ अब जल्द ही यह एक्ट का रूप ले लेगा। जिसे लेकर हफ्ते हुक्का बार के संबंध में आदेश जारी किए जा सकते हैं। आपको बता दें बाकी की प्रक्रिया जुलाई 2023 से शुरू होने वाले मानसून सत्र के दौरान पूरी होने की उम्मीद है। जिसके बाद उम्मीद है कि जुलाई से ही हुक्का बार को बैन करने की कार्रवाई शुरू हो जाए।

अभी तक नहीं था कोई एक्ट

आपको बता दें अभी तक हुक्का बार बंद करने को लेकर कोई एक्ट नहीं था। जिसके चलते हुक्का बार संचालक पुलिस की कार्रवाई से बचने में कामयाब हो जाते थे। यही कारण है कि कोई कानून न होने के कारण ये संचालक कोर्ट से स्टे लेने में सफल हो जाते थे।

क्या लिखा है हुक्का बार प्रतिबंध बिल में

हुक्का बार प्रतिबंध बिल की सबसे खास बात ये है कि यदि हुक्का बार के खिलाफ अगर शिकायत मिलती है तो पुलिस को वारंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिना किसी वारंट के ही आरोपी हुक्का बार संचालक पर कार्यवाही कर सकती है। इसे लेकर साफ तौर पर
बिल में लिखा गया है। हालांकि इसके लिए एक शर्त ये रखी गई है कि एक्शन लेने का अधिकार दारोगा या उससे ऊपर की रैंक के अफसर के पास ही होगा। मध्य प्रदेश के 200 से ज्यादा हुक्का बार में से 50 तो अकेले भोपाल में ही हैं।

इतने साल की होगी सजा

बिल में उल्लेखित है कि यदि हुक्का बार संचालक पर आरोप ​सिद्ध हो जाता है पुलिस द्वारा उसके हुक्का बार में जाकर सामान जब्त किया जा सकता है। इतना ही नहीं शिकायत मिलने पर आपराधिक केस दर्ज किया जा सकता है। इतना ही नहीं इसमें सजा का भी प्रावधान रखा गया है। जिसके अंतर्गत्क कम से कम एक साल और ज्यादा से ज्यादा तीन साल की सजा हो सकती है। साथ ही 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान भी बिल में रखा गया है।

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