Jabalpur High Court : हाई कोर्ट ने दिया FIR निरस्त करने का आदेश, जांच-DNA रिपोर्ट में नहीं हुई पुष्टि, जानें पूरा मामला

Madhya Pradesh (MP) High Court; मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने मिसरोद के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल के संचालक मिनीराज मोदी और सह आरोपी एसआई प्रकाश सिंह के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट की एफआईआर को निरस्त कर दिया

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

हाइलाइट्स

  • हाई कोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने का आदेश दिया
  • 2024 में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म की वारदात का मामला
  • पुलिस जांच, डीएनए रिपोर्ट में दुष्कर्म की नहीं हुई पुष्टि

High Court Ordered:मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने मिसरोद के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल के संचालक मिनीराज मोदी और सह आरोपी एसआई प्रकाश सिंह के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट की एफआईआर को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस जांच, डीएनए रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी।

यह है पूरा मामला

भोपाल के गंगासागर स्कूल में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म की वारदात सामने आई थी। इसके बाद 30 अप्रैल को मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने हॉस्टल की महिला वार्डन समेत अज्ञात तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पीड़ित बच्ची ने सीडब्ल्यूसी की काउंसलिंग में बयान में स्कूल संचालक मिनीराज मोदी का नाम लिया था। बयानों के आधार पर 13 मई को मिनीराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

मामले में नाबालिग छात्रा की मां ने आरोप लगाया था कि हॉस्टल में रहने के दौरान उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ। पीड़िता को घटना से 15 दिन पहले ही हॉस्टल में दाखिल किया गया था। बच्ची की मां के अनुसार,वीडियो कॉल पर बेटी रोते हुए दिखाई दी और उसने ब्लीडिंग की बात कही। ऐसे में वह स्कूल पहुंचीं और बेटी से मिलीं, तो मासूम ने मां को बताया कि चार-पांच दिन पहले शाम को उसने दाल-चावल खाए थे। फिर बाद में वार्डन ने उसे दोबारा दाल चावल खिलाए। रात में जब नींद खुली को वह अपने कमरे और बिस्तर पर नहीं थी।

बच्ची ने बताया कि वह रात को अपने बिस्तर पर नहीं थी और एक 'मोटे दाढ़ी वाले अंकल' ने उसके साथ गलत काम किया। मां ने मिनीराज मोदी, एसआई प्रकाश सिंह और एएसआई आरपी सिंह पर आरोप लगाए।

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जानें क्या आया जांच में सामने?

  • पुलिस ने केस दर्ज कर 13 मई 2024 को मिनीराज को गिरफ्तार किया था।
  • डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड और केमिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई।
  • खाने में नशीला पदार्थ भी नहीं मिला।
  • सीसीटीवी फुटेज में मिनीराज की उपस्थिति नहीं पाई गई।
  • शिनाख्ती परेड भी विश्वसनीय नहीं मानी गई, क्योंकि मां बच्ची को खुद मिनीराज के घर लेकर गई थीं।
  • केवल 42 में से 2 गवाह ही कोर्ट में पेश किए गए।

जबलपुर हाई कोर्ट ने पाया कि मामले में एविडेंस पुरे नहीं हैं। पहले ही मिनीराज को जमानत मिल चुकी थी। इसके आधार पर कोर्ट ने FIR को निरस्त कर दिया। मिनीराज के वकील आकाश तेलंग ने बताया कि 'साक्ष्यों की कमी और जांच रिपोर्ट्स को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।

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