MP High Court Case: कटनी कलेक्टर ने 300 रुपये में ठेकेदार को लीज पर दी सड़क, 3 गांव का रास्ता बंद, अब हाईकोर्ट से नोटिस

MP High Court Katni Collector: कटनी कलेक्टर ने 3 गांवों की सड़क एक ठेकेदार को लीज पर दे दी। ठेकेदार उस पर गिट्टी डंप करने लगा और रास्ता बंद हो गया।

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हाइलाइट्स

  • कटनी में 3 गांवों की सड़क बंद
  • ठेकेदार को लीज पर सड़क
  • ठेकेदार ने डंप की गिट्टी

MP High Court Katni Collector: कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने एक ठेकेदार को 300 रुपये की लीज पर सड़क दे दी। ठेकेदार उस रास्ते पर गिट्टी डंप करने लगा और इस वजह से 3 गांव का रास्ता बंद हो गया। ग्रामीणों को परेशानी हुई तो उन्होंने कलेक्टर से रास्ता खोलने का निवेदन किया। लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने जनहित याचिका लगाई।

MP हाईकोर्ट ने थमाया नोटिस

हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को रोड खोलने के निर्देश दिए, लेकिन फिर भी प्रशासन ने रोड नहीं खोला। इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए मध्यप्रदेश सरकार, कटनी कलेक्टर और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को नोटिस थमाया है।

बंद रास्ते को खोल दिया जाए

कोर्ट के निर्देश पर 10 नवंबर को कलेक्टर कटनी कलेक्टर और ठेकेदार व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। इसके साथ ही राज्य सरकार ने भी जवाब दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि बंद रास्ते को खोल दिया जाए और उसे आगे भी खुला रहने दें।

300 रुपये में लीज पर दी सड़क

हाईकोर्ट ने खनन के बाद डंप करने के लिए किराये पर दी सड़क दरअसल, कटनी जिले की बरही तहसील के करौंदी खुर्द, कन्नौर और बिचपुरा गांव तक जाने के लिए एक ही सड़क है। रोजाना सैकड़ों ग्रामीण तहसील और शहर आते-जाते हैं। 1 जुलाई 2025 को खनिज विभाग की रिपोर्ट पर कटनी कलेक्टर ने बरही तहसील के गांव कन्नौर के खसरा नंबर 861 की करीब 65 हेक्टेयर जमीन को लीज पर दे दिया। ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को हर साल सिर्फ 300 रुपये चुकाने हैं।

सड़क को डंपिंग साइट में बदलने की कोशिश

सड़क का इस्तेमाल खनन के बाद डंप करने के लिए होता है। इस जमीन का इस्तेमाल स्थानीय ग्रामीण कई सालों से कच्ची सड़क के रूप में करते आ रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी ये जमीन रास्ते के रूप में दर्ज है। प्रशासन ने मनमाने तरीके से इस सड़क को डंपिंग साइट में बदलने की कोशिश की। इसके चलते ग्रामीणों की आवाजाही रुकी और वे विरोध करने लगे। इसकी कलेक्टर से लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे पीड़ित पक्ष को कोर्ट जाना पड़ा।

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