मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना सीनियर की मंजूरी के जूनियर को जबरन प्राचार्य नहीं बना सकते

MP HC Junior Principal Appointment: प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर ग्वालियर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

MP HC Verdict

MP HC Junior Principal Appointment: प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर ग्वालियर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी कॉलेज में पहले से कोई वरिष्ठ (सीनियर) प्रोफेसर तैनात हैं, तो उनकी मंजूरी के बिना किसी जूनियर प्रोफेसर को जबरन प्रभारी प्राचार्य नहीं बनाया जा सकता।

गुना पीजी कॉलेज के प्रोफेसर की याचिका 

यह मामला गुना पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. बृज किशोर तिवारी की याचिका से जुड़ा है। वे पिछले 10 साल से कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन 8 नवंबर 2024 को उनसे जूनियर डॉ. प्रभात चौधरी को इस पद पर नियुक्त कर दिया गया। डॉ. तिवारी ने इसे लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि अगर याचिकाकर्ता (डॉ. तिवारी) चाहें तो किसी और कॉलेज में जा सकते हैं, नहीं तो उन्हें दूर के कॉलेज में भेजा जा सकता है। इस पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सीनियर प्रोफेसरों को नजरअंदाज करना और जूनियर को थोपना गलत है।

सभी सीनियर प्रोफेसरों से मांगी लिखित सहमति 

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी कॉलेज में मौजूद सभी सीनियर प्रोफेसर लिखित में सहमति दें कि वे जूनियर के अधीन काम करने को तैयार हैं, तो विभाग उस स्थिति में ही जूनियर को प्रभारी प्राचार्य बना सकता है।

यह फैसला राज्यभर के कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्तियों को लेकर बड़ा प्रभाव डाल सकता है और सीनियर प्रोफेसरों के हितों की रक्षा के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है।

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