MP High Court Judges Clash: एमपी हाई कोर्ट में दो जजों का टकराव, एक जज के आदेश पर दूसरे जज ने जताई आपत्ति

MP High Court Judges Clash: एमपी हाई कोर्ट में जजों के बीच टकराव, जस्टिस अतुल श्रीधरन ने जस्टिस राजेश गुप्ता के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।

MP High Court Judges Clash: एमपी हाई कोर्ट में दो जजों का टकराव, एक जज के आदेश पर दूसरे जज ने जताई आपत्ति

हाइलाइट्स

  • एमपी हाई कोर्ट में जजों के बीच विवाद
  • जस्टिस श्रीधरन का जस्टिस गुप्ता के आदेश पर आपत्ति
  • सरकार को 10 दिन में सुप्रीम कोर्ट जाने निर्देश

MP High Court Judges Clash: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) में बड़ा टकराव सामने आया है। ग्वालियर बेंच के जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता के आदेश पर जबलपुर बेंच के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने गंभीर आपत्ति जताई है। जस्टिस श्रीधरन की बेंच ने कहा कि जस्टिस गुप्ता का आदेश अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है और इस मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया।

जस्टिस गुप्ता के आदेश पर आपत्ति

12 सितंबर को जस्टिस गुप्ता ने शिवपुरी के अपर सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसी आदेश पर जस्टिस श्रीधरन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि यह फैसला अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने टिप्पणी की कि निचली अदालतों के जजों पर की गई टिप्पणियां अभद्र और अनुचित हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुका है कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायिक गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।

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राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्देश

जस्टिस श्रीधरन की बेंच ने साफ कहा कि जस्टिस गुप्ता का आदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है। इसके साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह 10 दिनों के भीतर इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करे। मामला धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें एएसजे विवेक शर्मा ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए थे। बाद में उसी आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस गुप्ता ने यह टिप्पणी की थी।

विवादित रही जस्टिस गुप्ता की नियुक्ति

जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की नियुक्ति शुरुआत से ही विवादों में रही है। जुलाई 2025 में उन्हें हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया था, लेकिन उनके खिलाफ मानसिक उत्पीड़न की शिकायत लंबित थी। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर उन्हें हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। महिला जज अदिति कुमार शर्मा ने उनकी पदोन्नति को चुनौती देते हुए याचिका भी लगाई थी, बावजूद इसके केंद्र सरकार ने नाम पर मुहर लगा दी और 28 जुलाई को राष्ट्रपति ने भी इस पर हस्ताक्षर कर दिए।

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मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) को लेकर पिछले छह सालों से चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इसे लेकर मध्यप्रदेश सरकार भी गंभीर दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण और चयनित उम्मीदवारों के 13 प्रतिशत पदों को होल्ड किए जाने से जुड़े मामलों की सुनवाई आज से रोजाना करने का फैसला लिया है। सरकार और विपक्ष दोनों पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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