MP High Court: राज्य सरकार को 100 करोड़ से अधिक की रामजानकी मंदिर भूमि केस में HC से बड़ा झटका, पुनर्विचार याचिका खारिज

MP High Court: ग्वालियर के बहोड़ापुर क्षेत्र स्थित जगनापुरा में 100 करोड़ से अधिक कीमत के रामजानकी मंदिर भूमि केस में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार की पुनर्विचार समीक्षा याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया हैं।

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हाइलाइट्स

  • हाईकोर्ट की एकल पीठ का फैसला
  • याचिका को कोर्ट ने आधारहीन बताया !
  • अधिवक्ता ने उत्तर देने नहीं मांगा टाइम !

MP High Court: ग्वालियर (​Gwalior) के बहोड़ापुर (Bahodapur) क्षेत्र स्थित जगनापुरा (Jaganpura) में 100 करोड़ से अधिक कीमत के रामजानकी मंदिर भूमि केस (ram janaki temple land case) में राज्य सरकार (state government) को हाईकोर्ट (High Court) से बड़ा झटका लगा है।

दरअसल, हाईकोर्ट (High Court) की सिंगल बेंच ने सरकार की पुनर्विचार समीक्षा याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न तो अभिलेख में कोई त्रुटि है और न ही राज्य सरकार (state government) के पास ऐसा कोई वैध आधार था, जिससे पहले दिए गए आदेश की समीक्षा की जाए।

पहले मंदिर के नाम थी जमीन

ग्वालियर (​Gwalior) के बहोड़ापुर (Bahodapur) में सर्वे क्रमांक 183, 187, 482, 487, 492, 494, 498, 503, 524 की करीब 19.10 बीघा जमीन पहले रामजानकी राधाकृष्ण मंदिर (ram janaki temple land case) के नाम दर्ज थी। वर्ष 1966 में भूमि नियमित भूस्वामी के नाम पर कर दी गई।

रिटायर्ड न्यायाधीश ने दी चुनौती

तत्कालीन संभागायुक्त दीपक सिंह (Divisional Commissioner Deepak Singh) ने इसे दोबारा मंदिर (माफी औकाफ) की संपत्ति घोषित करने का आदेश दिया। इस आदेश को सेवानिवृत्त न्यायाधीश एनके मोदी(Retired Judge NK Modi) ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर कोर्ट ने सरकार के आदेश को रद्द कर दिया।

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अधिवक्ता ने नहीं मांगा उत्तर-HC

राज्य शासन ने 20 मार्च 2024 को पारित आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि शासन को जवाब देने का अवसर नहीं दिया गया। लेकिन न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के (Justice Milind Ramesh Phadke) की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि शासन की ओर से अधिवक्ता ने स्वयं उत्तर दाखिल करने का समय नहीं मांगा, जिससे यह साबित होता है कि उन्हें उस समय उत्तर देना जरूरी नहीं लगा। अतः अदालत ने पुनर्विचार को अस्वीकार्य मानते हुए याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट का फैसला, हम सही

वर्तमान में जमीन मालिक अज्ञात गुप्ता (Land owner unknown Gupta) ने कहा, हमने पूरी तरह वैध तरीके से जमीन खरीदी थी। कुछ लोग इसे बेवजह विवादित करना चाहते थे। हाईकोर्ट (High Court) का फैसला बताता है कि हम सही थे।

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