MP High Court: जेल में तंबाकू सप्लाई करता है, कैदियों का पी जाता है दूध, खुद को प्रताड़ित बताने वाले आरोपी का पर्दाफाश

MP High Court News: भोपाल जेल ने मंगलवार को मर्डर के आरोपी गिर्राज यादव को प्रताड़ित करने के आरोपों का जवाब पेश किया।

MP High Court: जेल में तंबाकू सप्लाई करता है, कैदियों का पी जाता है दूध, खुद को प्रताड़ित बताने वाले आरोपी का पर्दाफाश

MP High Court News: भोपाल जेल ने मंगलवार को मर्डर के आरोपी गिर्राज यादव को प्रताड़ित करने के आरोपों का जवाब पेश किया। हाईकोर्ट को बताया कि अपराधी जेल में अवैध रूप से तंबाकू की सप्लाई करता है। जेल प्रबंधन के साथ वह अन्य कैदियों को परेशान करता है।

जेल प्रबंधन ने अदालत को बताया कि आरोपी गिर्राज यादव अन्य कैदियों के हिस्से का दूध पी जाता है। सख्ती करने पर भूख हड़ताल पर बैठ जाता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने मामला आदेश के लिए सुरक्षित रख लिया है। दरअसल, मामला अशोकनगर के पुलिस थाना बहादुरपुर का है।

2020 से जेल में बंद है आरोपी

गिर्राज यादव 27 अगस्त 2020 से सलाखों के पीछे है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर जेल प्रबंधन भोपाल एम्स में आरोपी के खर्च पर इसका इलाज करा रहा है। मंगलवार को अशोकनगर पुलिस के इंस्पेक्टर नरेश रावत ने भोपाल सेंट्रल जेल से गिर्राज को हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में पेश किया।

यादव ने जेल प्रबंधन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाने के साथ हत्या की आशंका जताई है। जेल प्रबंधक की तरफ से बताया गया कि आरोपी गिर्राज यादव शिवपुरी और अशोकनगर जेल में रहने की जिद पर अड़ा है।

रीवा जेल में मचाया था उत्पात

अधिवक्ता अंजली ज्ञानानी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ 33 मामले दर्ज हैं। गिर्राज ने रीवा जेल में उत्पात मचाया था। तब उसे भोपाल जेल शिफ्ट किया गया। हाईकोर्टमें आरोपी खुद अपनी पैरवी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में गिर्राज की ओर से एडवोकेट विवेक तन्खा ने पैरवी की।

पेड़ काटने के विवाद पर की थी हत्या

मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, 26 मई 2020 को मोहर सिंह बबूल का पेड़ काट रहा था। तभी बलराम यादव आया और जमीन उसकी होने का दावा करने लगा। बलराम ने फोन लगाकर गिर्राज यादव को बुलाया। कुछ देर पर गिर्राज अन्य साथियों के साथ वहां पहुंचा और खुमान सिंह, खिलन सिंह, मोहर सिंह, शेरसिंह और फूलबाई को पीटा। जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। गिर्राज ने टपरियों पर आग लगा दी थी। इलाज के दौरान खुमान की मौत हो गई।

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की बेंच वे मामले में आठ साल की सैलरी और लाभों का ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश दिए। जबलपुर निवासी अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद चौधरी ने अपना पक्ष रखा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

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