MP Govt Employee Child Policy: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी,अब 3 बच्चे हुए तो भी पात्र, जानें कब से होगा लागू

MP Govt Employee Child Policy: मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब सरकारी नौकरी में दो बच्चों की पाबंदी की शर्त हटाई जा रही है। अब तीन बच्चे वाले कर्मचारी भी पात्र होंगे।

MP Govt Employee Child Policy

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हाइलाइट्स

  • मप्र में तीन बच्चे वाले कर्मी भी होंगे पात्र
  • नियम में संशोधन को कैबिनेट से मिलेगी मंजूरी
  • छत्तीसगढ़- राजस्थान में हट चुकी है पाबंदी

MP Govt Employee Child Policy: मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब सरकारी नौकरी में दो बच्चों की पाबंदी की शर्त हटाई जा रही है। अब तीन बच्चे वाले कर्मचारी भी पात्र होंगे। एमपी सरकार 24 साल (26 जनवरी 2001) पहले लागू हुई इस शर्त को जल्द ही खत्म करने वाली है। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। जल्द ही इस विषय का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार अभी सरकारी कर्मचारियों के लिए दो से ज्यादा बच्चे होने पर बर्खास्ती का नियम है, लेकिन अब इस नियम में मोहन सरकार संशोधन करने वाली है। यानी अब 3 बच्चे वाले कर्मचारी भी पात्रता की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे।

हाई लेवल पर बनी सहमति

मंत्रालय सूत्र बताते हैं कि उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद यह कवायद शुरू हुई है। तमाम परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद अब जाकर हाई लेवल पर यह सहमति बन गई है कि कैबिनेट में ले जाकर इस शर्त को हटा दिया जाए। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अलग-अलग स्तरों पर कई बार राज्य को यह संकेत देता रहा है।

छत्तीसगढ़ -राजस्थान में पहले ही हट चुकी यह पाबंदी

मध्यप्रदेश के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ और राजस्थान पहले ही यह पाबंदी हटा चुके हैं। राजस्थान ने 11 मई 2016 और छत्तीसगढ़ ने 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी हटाई जा चुकी है। अब वहां तीन बच्चों पर भी नौकरी में लोग काम कर रहे हैं।

मप्र की प्रजनन दर 2.9...

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार मप्र की प्रजनन दर 2.9 है। शहरी क्षेत्रों में 2.1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.8 के करीब। राष्ट्रीय औसत 2.1 से यह अधिक है।

बिहार में सबसे अधिक प्रजनन दर

देश में बिहार सबसे अधिक प्रजनन दर वाला राज्य है। यहां प्रजनन दर 3.0 है। इसका आशय है कि बिहार में एक महिला औसतन 3 बच्चों को जन्म देती है। बिहार के बाद मप्र और मेघालय (2.9), उत्तर प्रदेश (2.4), झारखंड (2.3) और मणिपुर (2.2) जैसे राज्य आते हैं।

भोपाल की प्रजनन दर 2.0

मप्र में भोपाल की प्रजनन दर सबसे कम है। यह 2.0 है। अधिक दर वाले जिलों में पन्ना (4.1), शिवपुरी (4.0) और बड़वानी (3.9) है।

भागवत ने कहा था कम से कम तीन बच्चे हों

[caption id="attachment_907724" align="alignnone" width="742"]publive-image राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत।[/caption]

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने एक महीने पहले जनसंख्या नीति पर बोलते हुए कहा था कि भारत की जनसंख्या नीति 2.1 है, यानी औसतन तीन बच्चे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए क्योंकि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। मंत्रालय सूत्रों की मानें तो मोहन भागवत के इस बयान के बाद ही दो बच्चों की सीमा हटाने की प्रक्रिया को गति मिली और नीति में बदलाव की तैयारी शुरू हुई।

FAQ

नियम में संशोधन होते ही, तीसरी संतान से जुड़े केस समाप्त होंगे।

Q: नई व्यवस्था में तीसरी संतान से जुड़े मामलों का क्या होगा ?

नियम में संशोधन के बाद तीसरी संतान से जुड़े जितने भी केस कोर्ट या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। इन पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी।

Q: क्या पुरानी कार्रवाई वाले केस भी रद्द होंगे ?

बिलकुल नहीं, वर्ष 2001 के बाद जिन शासकीय सेवकों पर तीसरी संतान के आधार पर कार्रवाई हो चुकी है या वे नौकरी से बाहर किए जा चुके हैं, उन मामलों पर कोई सुनवाई नहीं होगी।

Q: इस बदलाव से कौन-कौन से विभागों में सबसे ज्यादा असर होगा ?

सबसे ज्यादा शिकायतें मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा, और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़ी हैं। अनुमान है कि ऐसे केसों की संख्या 8 से 10 हजार के बीच हो सकती है। मेडिकल एजुकेशन की करीब 12 शिकायतें तो सामान्य प्रशासन विभाग(GAD) तक पहुंच गईं, जिन पर फैसला होना है।

Q: क्या किसी बड़े अधिकारी की इस नियम को लेकर नौकरी गई है ?

पूर्व में एक जज की नौकरी दो संतान की पाबंदी की वजह से जा चुकी है।

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