MP के सरकारी स्कूलों के हाल: 80 हजार का वेतन लेने वाले कर रहे मंत्री-नेता की चाकरी, पढ़ाने के लिए भाड़े पर रखे शिक्षक

Madhya Pradesh Government (Sarkari) School Teachers Condition Update; मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के हार बुरे हैं। बीते साल रिजल्ट के मामले में देश में मध्य प्रदेश का 20वां स्थान था

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MP Teachers Hiring Case: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के हार बुरे हैं। बीते साल रिजल्ट के मामले में देश में मध्य प्रदेश का 20वां स्थान था। बिगड़ते सरकारी स्कूलों के रिजल्ट के मामले में अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
सरकारी स्कूलों में पदस्थ 80-80 हजार रुपये महीने का वेतन लेने वाले नियमित शिक्षक मंत्री-नेताओं की चाकरी में लगे हैं। इनकी जगह स्कूलों में भाड़े पर शिक्षक लगाए गए हैं।
3 हजार रुपये किराये पर शिक्षक
हजारों का वेतन लेने वाले शिक्षक मंत्री-नेताओं के साथ दिनभर घूम रहे हैं। उनकी जगहों पर स्कूलों में पढ़ाने के लिए 3-3 हजार रुपये किराये के शिक्षक रखे गए हैं। इनमें से कई तो शिक्षक बनने की न्यूनतम योग्यता (डीएड-बीएड) भी नहीं रखते हैं।
सब कुछ प्राचार्य और जनशिक्षकों के सामने हो रहा है, लेकिन कार्रवाई की जगह सभी पत्राचार की खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर रहे हैं।
बीमारी का बहाना, खिला रहे मंत्री को खीर
सागर जिले के मझेरा गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल में सरकार से 48 हजार रुपए महीना वेतन पाने वाले इंद्र विक्रम अपनी जगह पढ़ाने आ रही ममता अहिरवार को 3000 रुपए महीना दे रहे हैं। ममता ने स्कूल में पढ़ाने की वजह इंद्र विक्रम के बीमार होने को बताया जबकि इंद्र विक्रम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक के साथ फोटो पोस्ट किया है।
इसमें वे मंत्री के हाथों खीर खाते दिख रहे हैं। इंद्र विक्रम का कहना है कि सुबह-शाम केंद्रीय मंत्री खटीक के साथ समय व्यतीत करता हूं। दिन में स्कूल जाता हूं। कभी-कभी नहीं जा पाता, वह अलग बात है।
ये सरकारी शिक्षक कांग्रेसी है!
सागर के मालथौन में एकीकृत शासकीय माध्यमिक स्कूल भेलैयां का अलग ही मामला है। यहां के रूप सिंह चढ़ार खुद को कांग्रेसी नेता बताने में गर्व महसूस करते हैं। इनकी जगह विक्रम लोधी 5 महीने से पढ़ा रहे हैं। विक्रम सिर्फ 12वीं पास है। इन्हें भी यहां पढ़ाने के लिए 3 हजार रुपय महीना मिलता है।
हालांकि चढ़ार का कहना है कि वह नियमित स्कूल आते हैं। ये सवाल और है कि यदि सभी स्कूल आ रहे हैं तो फिर विक्रम किसकी जगह पर पढ़ा रहे हैं। चढ़ार की फोटो राहुल गांधी के साथ भी सामने आ चुकी है।
मैडम ने डेढ़ साल से रखा हुआ है किराये का टीचर
इसी तरह बिलहरा में एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला, बंजरिया में पदस्थ शिक्षिका जानकी तिवारी ने 7 हजार रुपये महीने पर डेढ़ साल से पढ़ाने के लिए गोकुल प्रजापति को स्कूल में किराये से रखा हुआ है।
मैडम तो सागर से कभी कभार ही स्कूल में दर्शन देने आती है। जानकी का वेतन 44 हजार रुपए है। उन्होंने कहा कि वे एक दिन छोड़कर स्कूल आती हूं।
किराये के शिक्षक के भरोसे ही पूरा स्कूल
बिलहरा में ही शासकीय प्राथमिक शाला, रहली किराए के शिक्षक भगवान दास सकवार के भरोसे पर है। उन्हें 5 हजार रुपए महीना मिलता है। वे यहां 2 साल से पढ़ा रहे हैं।
स्कूल में पदस्थ एकमात्र शिक्षक अनिल मिश्रा सागर में रहते हैं, कभी-कभी आते हैं। उन्हें 57 हजार रुपए वेतन मिलता है। मिश्रा ने बताया कि वे बीमार हैं और अवकाश पर हैं। ठीक होने पर ही स्कूल आएंगे।
स्कूल में पदस्थ सभी शिक्षकों ने रखे प्राइवेट टीचर
नर्मदापुरम जिले के खोकसर प्राथमिक स्कूल के सहायक शिक्षक सुरेश अतुलकर की जगह महिला प्राइवेट टीचर संगीता सवेरिया पढ़ाती हैं। बीएड पास संगीता बोली कि कोई मेहनताना नहीं लेती। स्कूल में कक्षा एक से पांच तक के 25 बच्चों को पढ़ाने के लिए 3 शिक्षक हैं लेकिन सभी में सिर्फ प्राइवेट टीचर ही पढ़ाती है।
100 फीसदी रिजल्ट इसलिए किसी को फर्क भी नहीं पड़ रहा
जिन स्कूलों में भाड़े के शिक्षक रखे गए हैं, उनमें रिजल्ट भी शत-प्रतिशत है। वजह- ये सभी स्कूल प्राथमिक हैं। इनमें रिजल्ट तैयार करने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों की ही होती है इसलिए ये सभी को पास कर देते हैं। 100 फीसदी रिजल्ट होने से किसी को कोई फर्क भी नहीं पड़ रहा।
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