Deori Nagar Palika: सरकार ने देवरी नपाध्यक्ष नेहा जैन को पद से हटाया, 3 आरोप साबित, विरोध में थे खुद की पार्टी के पार्षद

मध्यप्रदेश सरकार ने देवरी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन को भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों के चलते पद से हटा दिया गया है। शासन की जांच में चार में से तीन आरोप साबित हुए हैं।

Deori Nagar Palika: सरकार ने देवरी नपाध्यक्ष नेहा जैन को पद से हटाया, 3 आरोप साबित, विरोध में थे खुद की पार्टी के पार्षद

हाइलाइट्स

  • देवरी नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन पद से हटाई गईं।
  • शासन की जांच में भ्रष्टाचार समेत तीन आरोप साबित।
  • खुद की पार्टी के पार्षदों और विधायक ने की थी शिकायत।

MP Government Removed Sagar Deori Nagar Palika President Neha Jain: मध्य प्रदेश के सागर जिले की सियासत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई हैं। मध्यप्रदेश शासन ने देवरी नगर पालिका परिषद (Deori Nagar Palika) की अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन को भ्रष्टाचार, अनियमितता और तानाशाहीपूर्ण कार्यप्रणाली के आरोपों में पद से हटा दिया है।

बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली नेहा जैन (Neha Jain Deori) के खिलाफ उन्हीं की पार्टी के पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें से तीन आरोप सही पाए गए हैं। आरोपों पुष्टि होने के बाद सरकार ने यह कार्रवाई की है। अब उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। उनके खिलाफ विधायक बृजबिहारी पटैरिया ने भी विधानसभा में मुद्दा उठाया था, इस कार्रवाई के बाद देवरी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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नपाध्यक्ष जैन के खिलाफ क्यों हुई कार्रवाई?

सागर जिले की देवरी नगर पालिका परिषद की निर्वाचित अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन को मध्यप्रदेश शासन ने पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इस कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अवर सचिव शिवराज सिंह वर्मा ने आदेश जारी किया है। सोमवार 25 अगस्त 2025 को जारी आदेश के अनुसार, नेहा जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता और पद के दुरुपयोग सहित कुल चार गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनमें से तीन आरोप जांच में सत्य पाए गए।

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जांच में कौन-कौन से आरोप सही पाए गए?

देवरी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नेहा जैन के खिलाफ दर्ज शिकायतों की विभागीय जांच कराई गई थी। इस जांच में चार में से तीन आरोप गंभीर और सही पाए गए। ये तीन आरोप इस प्रकार हैं...

  • अनाधिकृत भर्ती: अध्यक्ष ने बिना विभागीय अनुमति और अधिकार के मस्टर रोल पर 13 कर्मचारियों और 2 कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति स्वयं के अनुमोदन से कर दी थी, जो कि स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध था।
  • एसी खरीदी में गड़बड़ी: नगर परिषद कार्यालय और रैन बसेरा सहित अन्य स्थानों पर एसी की खरीदी में वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। भुगतान प्रक्रिया में भी कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।
  • प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) को मनमाने ढंग से भंग करना: अध्यक्ष ने राजनीतिक कारणों से PIC को गैरकानूनी तरीके से भंग किया, क्योंकि इसमें शामिल पार्षद उनकी नीतियों के विरोध में थे। इस निर्णय का कोई वैधानिक आधार नहीं था, और इसे सत्ता का दुरुपयोग माना गया।

इन सभी मामलों में नियमों का उल्लंघन, वित्तीय गड़बड़ियां और पद का दुरुपयोग सामने आया। शासन ने मैदानी निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-A के तहत "लोकहित" और "परिषद हित" में कार्य न करने के आरोपों के चलते नेहा जैन को पद से पदमुक्त कर दिया गया है।

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बीजेपी के कितने पार्षद कर रहे थे अध्यक्ष का विरोध

देवरी नगर पालिका परिषद में कुल 15 पार्षद हैं, जिनमें से 14 पार्षद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से निर्वाचित हुए हैं। हैरानी की बात यह रही कि उन्हीं में से 9 पार्षद अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन के खिलाफ मैदान में उतर आए। नेहा जैन को बीजेपी से चुनाव जीतने के बावजूद उन्हीं की पार्टी के लगातार विरोध में थे।

इन पार्षदों ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली को अलोकतांत्रिक, तानाशाही और भ्रष्टाचार से ग्रसित बताया। उन्होंने धरना-प्रदर्शन किया, कलेक्टर कार्यालय से लेकर भोपाल पार्टी मुख्यालय तक कई स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराईं।

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विश्वास प्रस्ताव और गंभीर आरोप

अध्यक्ष के विरुद्ध पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया था। आरोपों में शामिल थे:

  • पार्षदों की उपेक्षा
  • वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं
  • मनमानी और पारदर्शिता की कमी
  • तानाशाही रवैया

मुख्यमंत्री और मंत्री तक पहुंचा था मामला

देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने खुद इस मुद्दे को गंभीरता से लिया था और पार्षदों के साथ मिलकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाया था। पटेरिया ने इसे विधानसभा में भी उठाया था, जिसके बाद शासन ने जांच करवाई।

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आरोप साबित होने पर खुशी का माहौल

जब विभागीय जांच के बाद तीन गंभीर आरोप सिद्ध हुए और शासन ने नेहा जैन को पद से हटाने का आदेश जारी किया, तो विरोध करने वाले पार्षदों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर, बधाई दी और इस कार्रवाई को "सही फैसले की जीत" बताया।

इस खबर के 5 महत्वपूर्ण FAQ

Q1. देवरी नपा अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन को पद से क्यों हटाया गया?

उत्तर: देवरी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष नेहा जैन को भ्रष्टाचार, अनियमितता और तानाशाहीपूर्ण कार्यप्रणाली के आरोपों में पद से हटाया गया है। जांच में चार में से तीन आरोप सही पाए गए, जिसके बाद मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने का आदेश जारी किया।

Q2. नेहा जैन के खिलाफ कौन-कौन से आरोप साबित हुए हैं?

उत्तर: बिना अनुमति 13 कर्मचारियों और 2 ऑपरेटरों की अवैध भर्ती, एसी की खरीदी में वित्तीय गड़बड़ी और अनियमित भुगतान, प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) को नियमों के विरुद्ध भंग करना।

Q3. क्या विरोध करने वाले पार्षद भी बीजेपी से थे?

उत्तर: हाँ, देवरी नगर पालिका के 14 में से 9 पार्षद, जो BJP से थे, उन्होंने ही अपनी पार्टी से नपा अध्यक्ष नेहा जैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया और गंभीर आरोप लगाए थे।

Q4. क्या विधायक ने भी इस मामले को उठाया था?

उत्तर: हाँ, देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने इस मामले को पहले बीजेपी संगठन, फिर मंत्री, और मध्यप्रदेश विधानसभा में भी उठाया था। उन्हीं की पहल पर जांच आगे बढ़ी।

Q5. कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान के तहत की गई?

उत्तर: नेहा जैन को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-A के तहत हटाया गया है, जिसमें लोकहित और परिषद हित में दायित्वों के पालन में विफल रहने पर अध्यक्ष को पद से हटाने का प्रावधान है।

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