MP Gehu Rate: मध्य प्रदेश की थोक मंडियों में गेहूं की आवक हुई कम, सरकार ने शुरू नहीं की बिक्री, बढ़ सकते हैं दाम!

MP Gehu Rate: मध्य प्रदेश की थोक मंडियों में गेहूं की आवक दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। कुछ समय बाद त्‍यौहारों को सीजन

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MP Gehu Rate: मध्य प्रदेश की थोक मंडियों में गेहूं की आवक दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। कुछ समय बाद त्‍यौहारों को सीजन आने वाला है ऐसे में त्यौहारों के शुरू होने से पहले गेहूं की मांग बढ़ने के साथ इसकी रेट भी बढ़ सकती हैं।

मार्केट या खुले बाजार की बात की जाए तो इसमें गेहूं दाम 9 महीने में सबसे अधिक पहुंच गए हैं। फ्लोर मिलों ने केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के साथ भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री जल्द से जल्द शुरू करने की बात भी कही है।

इतने बढ़ सकते हैं गेहूं के रेट

बाजार के जानकारों की मानें तो त्‍यौहार के सीजन में गेहूं के दाम और भी बढ़ने की संभावना है। सरकार यदि अपने गोदामों में रखे गेहूं के स्टॉक को जल्द से जल्द बाजारों में लेकर नहीं आती है या बाजार में अपने गेहूं को नहीं उतारती है तो खुले बाजारों में गेहूं के दाम 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की पूरी-पूरी संभावना है।

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अभी क्‍या है गेहूं की रेट

अभी वर्तमान समय में इंदौर मंडी में मिल में उपयोग में आने वाले गेहूं के दाम  2750-2850 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। इन बढ़ते दामों के कारण दक्षिण भारत की फ्लोर मिलर्स सबसे ज्यादा परेशान देखी जा सकती हैं। उन्हें माल की आपूर्ति उत्तर भारत से होती है।

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उनके लिए ताजा सौदे बहुत महंगे हो रहे हैं इसका कारण यह है कि वहां गेहूं का उत्‍पादन न के बराबर ही होता है। पिछले साल यानी 2023 में सरकार ने जून के आ‍खिरी सप्ताह से ओएमएसएस के तहत गेहूं की साप्ताहिक ई-नीलामी शुरू की थी और जून 2023 से फरवरी 2024 के बीच लगभग 100 लाख टन गेहूं की बिक्री हो गई थी।

इससे पता चलता है कि फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स को गेहूं की कितनी भारी जरूरत होती है। इस साल भी उतनी या उससे अधिक आवश्यकता देखने को मिल सकती है। सरकार अब तक इस समस्‍या को नजरअंदाज कर रही है।

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