Sagar Crusher Case: मप्र सरकार, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, कलेक्टर-SP को SC का नोटिस, हाईटेंशन से बच्चे का हाथ कटा था

Sagar Crusher Case: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता भूपेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया। सागर में हाईटेंशन लाइन हादसे में घायल 12 साल के बच्चे की शिकायत पर कोर्ट ने एसपी, कलेक्टर और प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।

Sagar Crusher Case: मप्र सरकार, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, कलेक्टर-SP को SC का नोटिस, हाईटेंशन से बच्चे का हाथ कटा था

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया
  • सागर हादसे में घायल बच्चे की शिकायत पर दो अफसरों से जवाब तलब
  • कोर्ट ने चार सप्ताह में सभी से जवाब मांगा

Sagar Crusher Case Update: मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता भूपेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश की सर्वोच्च अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किया है। इस नोटिस को सागर जिले के बारदा गांव में हुई एक गंभीर घटना के संबंध में जारी किया गया है। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 12 साल का बच्चा मानस शुक्ला गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिस कारण इलाज के दौरान उसका हाथ काटना पड़ा। बच्चे का हाथ भूपेन्द्र सिंह के भतीजे के क्रेशर पर हाईटेंशन से कटा था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भूपेंद्र सिंह समेत उनके भतीजे लखन सिंह, सागर के एसपी और कलेक्टर के साथ मध्यप्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

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क्या है पूरा मामला

मामला बारदा गांव के क्रेशर के पास का है, जहां मानस शुक्ला हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया। हादसे के बाद डॉक्टरों ने बच्चे के हाथ काटने पड़े। इसके बावजूद पुलिस ने शुरुआती शिकायत के बाद कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। मानस के पिता राकेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रदेश के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता भूपेंद्र सिंह के रसूख की वजह से पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इस शिकायत को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) में भी याचिका दायर की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई की और कठोर रुख अपनाते हुए संबंधित सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।

पीड़ित परिवार की शिकायत

मानस शुक्ला ने बताया कि उनके पिता हर महीने भूपेंद्र सिंह के घर गए, लेकिन भूपेंद्र भैया उनसे और उनके परिवार से मिलने नहीं आए। उन्होंने कहा कि उनके पिता को कई घंटे तक बैठ कर रखा गया, लेकिन इस दौरान कोई मदद या जानकारी नहीं दी गई। उन्हें पूरी तरह गुमराह किया गया।

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पीड़ित परिवार का कहना है कि भूपेंद्र सिंह ने उन्हें 5-6 महीने तक नजरअंदाज किया और उनके हालचाल तक नहीं पूछा। उनका आरोप है कि सत्ता इस्तेमाल कर उनके परिवार पर दबाव डाला गया।

पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह का जवाब

इस मामले में भूपेंद्र सिंह ने साफ किया कि उनके भाई और भतीजे के अवैध कार्यों से उनका कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार केवल उनकी पत्नी और बेटियों और बेटे तक ही सीमित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई उनके नाम का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों या व्यवसाय में करता है और उसे मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रचारित करता है, तो इसे उनकी सहमति के बिना माना जाएगा। ऐसे मामलों में वे कानूनी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।

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भूपेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके पैतृक संपत्ति के बंटवारे के बाद किसी अन्य के कार्यों से उनका कोई संबंध नहीं है। सभी भाई-भतीजे अपना व्यवसाय स्वतंत्र रूप से करते हैं।

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