MP FSO 2025: इंदौर में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से अभ्यर्थियों ने सौंपा ज्ञापन, परीक्षा में भाषा को लेकर बदलाव की मांग

MP FSO 2025: इंदौर में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग मे अभ्यर्थियों ने सोमवार को ज्ञापन दिया है। जानें पूरा मामला क्या है..

MPPSC

MP Food Safety Officers Recruitment: इंदौर में अभ्यर्थी 27 जनवरी को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के दफ्तर ज्ञापन देने पहुंचे। यहां अभ्यर्थियों ने सचिव के नाम ज्ञापन दिया। अभ्यर्थियों ने कहा कि फूड सेफ्टी ऑफिसर की एग्जाम की योजना और सिलेबस में दिया गया है कि एग्जाम पार्ट B केवल इंग्लिश लैंग्वेज में होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि एमपी में ज्यादातर एस्पिरेंट्स हिंदी मीडियम के हैं। लगभग सभी हिंदी मीडियम के एस्पिरेंट्स ने  इसी माध्यम से तैयारी की है। ऐसे में उन्हें मुश्किल होगी। 

दोनों भाषाओं में परीक्षा की मांग 

अभ्यर्थियों ने कहा कि दूसरे हिंदी भाषी राज्यों में फूड सेफ्टी ऑफिसर की एग्जाम दोनों माध्यम में होती है। हिंदी माध्यम वाले अभ्यर्थियों की संख्या को देखते हुए यहां भी पूरी परीक्षा दोनों माध्यम में होना चाहिए। दरअसल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी-2024 भर्ती की परीक्षा जून में आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा योजना और पाठ्यक्रम 23 जनवरी 2025 को घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 27 जनवरी को अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में ज्ञापन दिया है। 

ज्ञापन में अभ्यर्थियों की मांग

MP FSO Gyapan

  • परीक्षा के खंड ब (खाद्य विज्ञान एवं तकनीकी) विषय केवल अंग्रेजी माध्यम में होना प्रस्तावित है।
  • हिंदी को राजभाषा अधिनियम 1957 के तहत मध्यप्रदेश की आधिकारिक भाषा घोषित किया है, साथ ही राजभाषा अधिनियम 1956 के तहत मध्यप्रदेश को हिंदी में प्रवीणता वाले राज्यों के अंतर्गत क्षेत्र क में रखा गया है। इस परीक्षा को केवल अंग्रेजी में आयोजित करवाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है।
  • विद्यार्थियों में से अधिकांश ने हिंदी भाषा के साथ अपना अध्ययन किया है। वहीं, मध्यप्रदेश जैसे हिंदी भाषी राज्य में जहां एक ओर सरकार MBBS जैसे चिकित्सा पाठ्यक्रम हिंदी में आयोजित करवा रही है। दूसरी ओर, हम जैसे हिंदी भाषी विद्यार्थियों को अंग्रेजी में पेपर देना कठिन सा प्रतीत होता है।
  • हम विद्यार्थियों में से अधिकांश आदिवासी बाहुल्य जिलों में निवासरत है। सामान्यतः यह देखा गया है कि ऐसे क्षेत्रों से पढ़कर अंग्रेजी जैसी भाषा के साथ विद्यार्थियों की उतनी सहजता नहीं बन पाती है।
  • केवल अंग्रेजी में परीक्षा आयोजित होने से हम योग्य रहने के बावजूद भी अंग्रेजी माध्यम के छात्रों से प्रदर्शन में पीछे रह जाएंगे।
  • अन्य हिंदी भाषी राज्यों झारखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश आदि में भी उक्त परीक्षा अंग्रेजी के साथ मुख्यत: हिंदी माध्यम में आयोजित की गई थी। उन्होंने यहां हुए एग्जाम के पेपर भी ज्ञापन में संलग्न किए है।
  • अभ्यर्थियों ने मांग की है कि परीक्षा योजना में परिवर्तन कर खंड ब (खाद्य विज्ञान एवं तकनीकी) के माध्यम को अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी आयोजित किया जाए।

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