MP khad Crisis: खाद की किल्लत पर कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना का बड़ा बयान, कहा- हमारे पास DAP का पूरा स्टॉक

MP Khad Crisis: मध्य प्रदेश में किसानों को खाद संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रदेश में DAP खाद की कोई कमी नहीं है।

MP khad Crisis: खाद की किल्लत पर कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना का बड़ा बयान, कहा- हमारे पास DAP का पूरा स्टॉक

MP khad Crisis: एक तरफ मध्यप्रदेश के किसानों को खाद संकट से जूझना पड़ रहा है तो वहीं कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना को ये किल्लत नजर ही नहीं आ रही है। दरअसल जब उनसे प्रदेश में खाद की कमी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, सूबे में DAP की किल्लत नहीं है। उन्होंने खाद संकट के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहरा दिया।

[caption id="attachment_890457" align="alignnone" width="785"]publive-image कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना[/caption]

क्या बोले कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना? 

इस दौरान कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है, हमारे कांग्रेस के मित्र अनर्गल बातें कर रहे हैं। खरीफ 2025-26 में DAP की कुल मांग 2 लाख 50 हजार मीट्रिक टन है, जिसमें से 2 लाख 40 हजार प्राप्त हो चुका है। अभी स्टॉक में हमारे पास 3 लाख 82 हजार मीट्रिक टन है। खाद की कोई कमी नहीं है, ये बात सही है कि बांटने में दिक्कत आ रही है। मांग 4 जगह हो रही है और हम अभी सिर्फ एक जगह ही खाद बांट पा रहे हैं। हमने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बैठक की है, इसमें सीएम ने निर्देश दिए थे कि जहां एक दुकान है, वहां दो कर दी जाए। जरूरत हो तो चार कर दी जाएं।

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कई जिलों में खाद की मारामारी

ये पहला साल नहीं है जब मध्य प्रदेश के किसानों को खाद की समस्या हो रही है। प्रदेश में कई दिनों से खाद एक सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। हरदा अकेला जिला नहीं है, जहां किसान लंबी कतारों और कई दिनों के इंतजार के बाद भी खाद पाने के लिए जूझ रहे हैं। बड़वानी, खंडवा, शिवपुरी, अशोकनगर, बुरहानपुर, खरगोन, नर्मदापुरम और विदिशा सहित कई जिलों में यही हाल है। कई जगह हालात इतने बिगड़ गए हैं कि खाद वितरण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों एसडीएम और अपर कलेक्टर को खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ रही है।

बारिश में भीगते हुए घंटों इंतजार के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही। यहां तक कि टोकन मिलने के बावजूद किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। यह पहला साल नहीं है जब किसानों को खाद के लिए मारामारी झेलनी पड़ रही हो। चाहे रबी सीजन हो या खरीफ सीजन, लगभग हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। किसान लंबी कतारें लगाते हैं, कई दिन इंतजार करते हैं, कई बार डंडे भी खाते हैं, लेकिन उन्हें समय पर और पर्याप्त खाद नहीं मिलती।

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