भारतीय किसान संघ की बैठक: किसानों की समस्याओं को जानने गांव-गांव पहुंचेगा संघ, प्रदेश में फिर सड़क पर उतरेंगे अन्नदाता?

MP Farmer Protest: मध्यप्रदेश में खाद और बीज की समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ मध्यभारत प्रांत इकाई जन जागरण अभियान चलाएगी।

भारतीय किसान संघ की बैठक: किसानों की समस्याओं को जानने गांव-गांव पहुंचेगा संघ, प्रदेश में फिर सड़क पर उतरेंगे अन्नदाता?

MP Farmer Protest: मध्यप्रदेश में खाद और बीज की समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ मध्यभारत प्रांत इकाई जन जागरण अभियान चलाएगी। इसे लेकर किसान संघ ने प्रदेश कार्यालय में बैठक की।

मीटिंग में पूरे प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, प्रांत में रहने वाले प्रदेश के सभी अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में किसानों की समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा की गई। मीटिंग में तय हुआ कि खाद-बीज को लेकर किसान संघ अभियान (MP Farmer Protest) चलाएगा।

गांव-गांव जाकर संपर्क करेगा संघ
प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि, बैठक में संगठन ने प्रांत में होने वाली खाद की किल्लत, नकली बीज और दवाईयों की समस्या के साथ राजस्व की समस्या पर चर्चा की।

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इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ की भारतीय किसान संघ गांव-गांव में जाकर ((MP Farmer Protest) ) संपर्क करेगा और किसानों को हो रही समस्याओं इकट्ठा करेगा।

सभी तहसील मुख्यालयों पर सौंपेंगे ज्ञापन
किसान संघ की बैठक में फैसला हुआ कि, "5 से 15 जनवरी तक सभी तहसील मुख्यालयों (MP Farmer Protest) पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपेंगे"।

बैठक में प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान, प्रांत संगठन मंत्री मनीष शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष नमो नारायण दीक्षित, प्रदेश महामंत्री चंद्रकांत गौर मौजूद थे।

प्रदेश में हुई थी खाद-बीज की किल्लत
आपको बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश के कई जिलों में खाद की समस्या से किसानों को भारी परेशान हुई थी। प्रदेश में डीएपी-यूरिया की कालाबाजारी ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थी।

उस वक्त एमपी के कई जिलों में किसानों ने खाद की समस्या को लेकर प्रदर्शन (MP Farmer Protest) भी किया था। खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी-लंबी लाइनों की तस्वीरें सामने आई थी।

4 महीने पहले प्रदेश में हुआ था आंदोलन
आपको बता दें कि सितंबर 2024 में ही प्रदेश में एक बड़ा आंदोलन (MP Farmer Protest) किया था। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 6 हजार रुपए करने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के किसानों ने 2 महीने तक आंदोलन किया था।

उस वक्त सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग मान ली, लेकिन भाव 6 हजार रुपए नहीं किए थे। मध्यप्रदेश में 14 साल बाद ऐसा आंदोलन नजर आया था, जिसमें सरकार ने किसानों की बात मानी थी।

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