MP Fake Doctor: छत्तीसगढ़ के पूर्व स्पीकर ने गंवाई थी जान, फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव ने की थी सर्जरी, तब भी मचा था बवाल

MP Fake Doctor Update: दमोह मिशन अस्पताल में इलाज के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने 7 मरीजों की जान ले ली। आरोपी नरेंद्र विक्रमादित्य यादव पहले भी छत्तीसगढ़ में विधानसभा अध्यक्ष की संदिग्ध सर्जरी में शामिल रहा है। जानिए पूरा मामला।

MP Fake Doctor Update

MP Fake Doctor Update: मध्य प्रदेश में हाल ही में एक फर्जी डॉक्टर के इलाज के चलते सात लोगों की जान चली गई। यह वही व्यक्ति है जिसने 18 साल पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की सर्जरी की थी, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। अब वह कुछ महीनों से मध्य प्रदेश में सक्रिय था। इसी दौरान कई मौतों का मामला सामने आने के बाद दमोह के मिशन अस्पताल के इस डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

यहां बता दें, वर्ष 2006 में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में सर्जरी के दौरान हुई मौत हो गई थी, जिसके बाद काफी बवाल मचा था। ह

फर्जी डॉक्टर के आधार कार्ड पर नरेंद्र यादव दर्ज

एक न्यूज चैनल के अनुसार, पूर्व स्पीकर की सर्जरी को करने वाले डॉक्टर पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। लगभग दो दशकों बाद, वही नाम एक बार फिर से चर्चा में आया है, लेकिन इस बार मध्य प्रदेश के दमोह में। जिस व्यक्ति को उसके मरीज डॉ. एन. जॉन कैम के नाम से जानते थे, जो ब्रिटेन से लौटे एक कार्डियोलॉजिस्ट थे, वह वास्तव में देहरादून का निवासी निकला। उसके अतीत के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उसकी डिग्रियां संदिग्ध थीं और उसके पास कार्डियोलॉजी में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था।

इसके बावजूद, वह दमोह के मिशन अस्पताल में एंजियोग्राफी और एनियोप्लास्टी जैसी जटिल सर्जरी कर रहा था। पुलिस ने बताया कि उसके आधार कार्ड पर उसका असली नाम नरेंद्र विक्रमादित्य यादव दर्ज है।

फर्जी डॉक्टर की डिग्रियों पर वेरिफाइड रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं

उसकी योग्यताएं - आंध्र प्रदेश से MBBS की डिग्री प्राप्त करने के बाद, उसने दार्जिलिंग, कोलकाता और यूके जैसी विभिन्न स्थानों से MD और कार्डियोलॉजी में कई डिग्रियां हासिल की, लेकिन इनमें से किसी भी डिग्री का वेरिफाइड रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं था।

यादव को एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नौकरी मिली थी और उसने फर्जी पहचान के तहत हृदय रोगियों का उपचार करना शुरू कर दिया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, उसने 15 सर्जरी की, जिसके परिणामस्वरूप सात मरीजों की मौत हो गई।

मृतकों में रहीसा बेगम, मंगल सिंह, बुद्ध अहिरवाल, इसराइल खान और दसोंदा रायकवार शामिल हैं, जिनकी मृत्यु कथित तौर पर उसकी सर्जरी या उपचार के कुछ घंटों के भीतर हुई।

फर्जी डॉक्टर की करतूत ऐसे आई सामने

इस खतरनाक खेल की गंभीरता तब उजागर हुई जब रहीसा बेगम और मंगल सिंह जैसे प्रभावित परिवार सामने आए।

12 जनवरी को रहीसा को सीने में दर्द हुआ, जिसके तीन दिन बाद उनकी सर्जरी की गई, लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई। उनके बेटे नबी कुरैशी ने कहा, "जैसे ही मेरी मां का निधन हुआ, डॉक्टर वहां से गायब हो गए।"

[caption id="attachment_791784" align="alignnone" width="1014"]publive-image मध्यप्रदेश के दमोह स्थित मिशन हॉस्पिटल का फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव।[/caption]

मंगल सिंह को पेट में समस्या के कारण अस्पताल लाया गया, लेकिन उनका भी ऑपरेशन हुआ और उसी दिन उनकी भी मौत हो गई। उनके बेटे जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया, "जिन इंजेक्शनों का आदेश दिया गया था, वो भी नहीं दिए गए। जब हमने पोस्टमार्टम की मांग की, तो अस्पताल ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है और हमें शव दे दिया।"

कई परिवारों ने यह शिकायत की है कि उन्हें जरूरी इंजेक्शन या दवाएं नहीं दी गईं। कुछ मामलों में, अस्पताल ने पोस्टमार्टम न कराने पर जोर दिया, यह कहते हुए कि "अब इसका क्या फायदा? ऑपरेशन हो चुका है।" अब इस मामले की शिकायत दर्ज कराई गई है और जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष शुक्ला की 2006 में की थी सर्जरी

[caption id="attachment_791787" align="alignnone" width="754"]publive-image छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला।[/caption]

नरेंद्र यादव का विवादों से पुराना रिश्ता है। 2006 में, उनका नाम छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत से जुड़ा था, जो बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में सर्जरी के दौरान निधन हो गए थे।

उस समय यादव को ब्रिटेन में एक नामी डॉक्टर के रूप में पेश किया गया था। जांच के आदेश तो दिए गए थे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अब, जब उसके साथ जुड़ी नई मौतों की खबरें आई हैं, तो यह सवाल उठ रहा है कि उसे ब्लैक लिस्ट में क्यों नहीं डाला गया? उसे फिर से प्रैक्टिस करने की इजाजत कैसे मिली?

...सिस्टम ने कुछ किया होता तो निर्दोषों की जान बच जाती

दिवंगत स्पीकर के परिवार के सदस्य, रिटायर वकील अनिल शुक्ला ने कहा, "हमें पहले से ही पता था कि वह योग्य नहीं थे। अगर उस समय सिस्टम ने कुछ किया होता, तो आज कई निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी।"

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जब बार-बार कैथेटर डालने की जरूरत पड़ी, तो मुझे संदेह हुआ

उन्होंने बताया, "मेरे पिता की सर्जरी हुई थी और मैं वहां मौजूद था। जब बार-बार कैथेटर डालने की जरूरत पड़ी, तो मुझे संदेह हुआ। बाद में, दूसरों ने भी हमें बताया कि डॉक्टर धोखेबाज हैं, लेकिन अपोलो अस्पताल ने उन्हें 'लंदन से लौटे' विशेषज्ञ के रूप में पेश किया और उनकी इतनी प्रशंसा की कि हमें उन पर विश्वास करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं मिला। अब सरकार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और हाई कोर्ट के मौजूदा जज से जांच कराने का आदेश देना चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।"

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