MP Employees Salary: मध्यप्रदेश में अफसरों वाली सैलरी पा रहे कर्मचारी, साढ़े पांच साल में भी उस लेवल का नहीं मिला पदनाम

Madhya Pradesh Employees Salary Vs Designation Power: मध्यप्रदेश में कई सरकारी कर्मचारी पहली और दूसरी श्रेणी के अफसरों वाली सैलरी पा रहे हैं, लेकिन साढ़े पांच साल में भी मध्यप्रदेश सरकार उनका पदनाम या यूं कहे कि पावर नहीं बढ़ा पाई हैं।

MP Employees Salary

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हाइलाइट्स

  • 2020 में जीएडी जारी कर चुका है आदेश
  • कुछ विभाग सैलरी के साथ दे रहे पदनाम
  • प्रदेशभर में 4.15 लाख सरकारी कर्मचारी

Madhya Pradesh Employees Salary Vs Designation Power: मध्यप्रदेश में कई सरकारी कर्मचारी पहली और दूसरी श्रेणी के अफसरों वाली सैलरी पा रहे हैं, लेकिन आज भी वह तीसरे और चौथी श्रेणी के कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। साढ़े पांच साल में भी मध्यप्रदेश सरकार उनका पदनाम या यूं कहे कि पावर नहीं बढ़ा पाए हैं।

मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने बताया कि मध्यप्रदेश में करीब चार लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से कई कर्मचारी अपने प्रमोशन के लिए जरूरी शर्ते पूरी कर चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से रोक की वजह से प्रमोशन नहीं ले पाए थे। हालांकि, साढ़े पांच साल पहले उनका तीसरा और चौथा समयमान वेतनमान देने की घोषणा की गई। इसमें से लगभग सभी को पहली और दूसरी श्रेणी के अफसर लेवल की सैलरी मिलने लगी हैं, लेकिन आज तक उस सैलरी के समान उनका पदनाम यानी पावर नहीं बढ़ाया गया।

साढ़े पांच साल पहले जारी किया था ये आदेश

नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से 9 मार्च 2020 को तीसरे और चौथे समयमान वेतनमान का आदेश जारी किया था। जिसमें स्पष्ट किया था कि प्रमोशन नहीं होने तक की स्थिति में शर्ते पूरी कर चुके कर्मचारियों का पदनाम बढ़ाया जाएगा। हालांकि, आज भी कई विभागों में यह व्यवस्था नहीं है।

ज्यादा पैसा देकर कम काम भी घोटाला

कर्मचारी संगठन के नेताओं की माने तो पहले और दूसरे श्रेणी के लेवर की सैलरी देकर तीसरे और चौथे श्रेणी के लेवल का काम लेना, एक प्रकार से वित्तीय घोटाला है ! क्योंकि किसी कर्मचारी को ज्यादा पैसा देकर कम काम नहीं करा सकते। इस पर ​शिकायत हुई तो ऑडिट में बड़ा ऑब्जेशन आ सकता है !

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एससी, एसटी, ओबीसी में खत्म होंगे मतभेद

वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लागू किए जा रहे प्रमोशन नियम 2025 से कर्मचारियों में मतभेद बढ़ रहे हैं। तीसरे और चौथे समयमान वेतनमान के साथ पदनाथ मिलने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में प्रमोशन नियम 2025 से फैले मतभेद दूर हो जाएंगे।

पदनाम के लिए सभी विभाग अधिकृत

मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक कहते हैं कि जिन कर्मचारियों को तीसरा और चौथा समयमान वेतनमान मिल चुका हैं, उन्हें तीसरी-चौथी पदोन्नति की शर्तें पूरी करने के लिए पात्र माना गया है। फिर भी पदनाम देने में क्या दिक्कत हैं ? जबकि सामान्य प्रशासन विभाग परिपत्र जारी कर सभी विभागों को अधिकृत भी कर चुका है।

[caption id="attachment_898104" align="alignnone" width="1183"]MP Employees Salary वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लागू किए जा रहे प्रमोशन नियम 2025 से कर्मचारियों में मतभेद बढ़ रहे हैं।[/caption]

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ये विभाग बढ़ा चुके हैं पदनाम

सामान्य प्रशासन विभाग खुद अपने जारी आदेश का पालन नहीं कर पाया है। हालांकि, राज्य प्रशासनिक सेवा, कोष व लेखा, स्वास्थ्य, शिक्षा, जनजातीय कार्य विभाग में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है।

पदनाम नहीं देने के पीछे ये तर्क

कर्मचारी संगठन के नेताओं के मुताबिक, पदनाम नहीं देने पर सरकार और संबंधित विभाग प्रमुखों का तर्क है कि मंजूर पदों से अधिक संख्या, नीचे के पद खाली न हो पाना समेत अन्य समस्याओं की वजह से पदनाम नहीं दिया जा सकता हैं।

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पदनाम बढ़ने के क्या फायदे ?

- पदनाम बढ़ने से अधिकारिक रूप से विभाग में पावर बढ़ जाता है।
- जिस लेवल का पदनाम होगा, उस लेवल की सुविधाएं भी बढ़ती हैं।
- जैसे गाड़ी, बंगला, कार्यालय समेत अन्य खर्च मिलने लगते हैं।
- कार्य क्षेत्र में ओहदा बढ़ने से समाज में प्रतिष्ठा बढ़ जाती है।

टाइम स्केल के क्या है नियम ?

  • जो पदोन्नति की शर्ते पूरी करता है, वह टाइम स्केल के लिए पात्र होता है।
  • पहले और दूसर श्रेणी के अधिकारियों का हर आठ साल में प्रमोशन का नियम है।
  • तीसरे और चौथे श्रेणी के कर्मचारियों का हर दस साल में प्रमोशन का नियम हैं।
  • अधिकारी-कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल में कई बार प्रमोशन का लाभ पा सकता है।
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