DPC की पैसे मांगते कॉल रिकॉर्डिंग वायरल: कर्मचारी ने कहा-हर माह 50 हजार की डिमांड करते हैं,अफसर बोला-सरकारी राशि मांगी

Madhya Pradesh District Project Coordinator (DPC) OP Sharma Viral Audio Case: इसमें वे अपने अधीनस्थ सहायक परियोजना समन्वयक (एपीसी) वीरेंद्र चौरसिया से पैसों के लेन-देन की बातचीत कर रहे हैं।

MP Officer Viral Audio

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MP Officer Viral Audio: मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग के एक अधिकारी का अपने कर्मचारी से पैसे मांगने का ऑडियो लीक हुआ है। यह ऑडियो भोपाल के जिला शिक्षा केंद्र (District Education Center) के जिला परियोजना समन्वयक ओपी शर्मा का है, जिसमें वे अपने सहायक परियोजना समन्वयक (एपीसी) वीरेंद्र चौरसिया से पैसे के लेन-देन पर चर्चा कर रहे हैं।

एपीसी का दावा- डीपीसी लगातार पैसे मांगते हैं

एपीसी चौरसिया का कहना है कि डीपीसी शर्मा लगातार पैसे मांगते रहते हैं। उनका कहना है कि जिले में कई हॉस्टल और स्कूल हैं, बस कहीं से भी पैसे लाओ, मुझे चाहिए। इसके अलावा, डीपीसी पर यह भी आरोप है कि वे कर्मचारियों से पद के लिए हर महीने 50 हजार रुपए देने को कहते हैं।

डीपीसी ने सफाई में क्या कहा ?

डीपीसी शर्मा ने मीडिया को बताया कि 'ऑडियो में मेरी ही आवाज है, लेकिन जिन पैसों की बात हो रही है, वो सरकारी राशि है, जो एडवांस के रूप में कर्मचारी वीरेंद्र चौरसिया को दी गई थी। मैं उसी को लौटाने की बात कह रहा हूं।'

दोनों के बीच क्या बातचीत हुई

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डीपीसी ओपपी शर्मा और एपीसी वीरेंद्र चौरसिया के बीच हुई फोन पर हुई चर्चा...

ओपी शर्मा: पैसे लाकर अभी दो, आधे घंटे के अंदर।
वीरेंद्र चौरसियाः किसको देना है, सर?
ओपी शर्मा: भगवान सिंह हैं या शफीक को जाकर दे देना। वहां पर आकाश परमार है, उनको दे देना।
वीरेंद्र चौरसियाः कितना देना है?
ओपी शर्मा: बोल दिया है उनको, आपको भी बोल दिया है।
वीरेंद्र चौरसियाः सर, एटीएम नहीं लाए हैं, किसी से उधार लेकर देता हूं।
ओपी शर्माः सुबह बोला था आपको, अभी लाकर दो बिना देर किए।
वीरेंद्र चौरसियाः जी सर

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एपीसी ने वीरेंद्र चौरसिया ने लगाए ये आरोप

डीपीसी ओपी शर्मा ने एक कॉल में वीरेंद्र कुमार चौरसिया से पैसे मांगे। वीरेंद्र ने बताया कि वो जिला शिक्षा केंद्र में सहायक परियोजना समन्वयक के पद पर थे और शर्मा बार-बार उनसे पैसे मांगते थे। वो कहते थे कि जिले में कई हॉस्टल और स्कूल हैं, कहीं से भी पैसे लाओ, मुझे पैसे चाहिए। वीरेंद्र ने आरोप लगया कि डीपीसी ओपी शर्मा ने कहा था कि अगर रिश्वत नहीं दी मुझे काम से हटा दिया जाएगा।

रिश्वत देने से मना किया तो काम से हटा दिया

वीरेंद्र चौरिया ने बताया कि मैंने साफ-साफ कह दिया कि मैं रिश्वत नहीं दूंगा और न ही किसी से जबरन पैसे लूंगा। इसके बाद उन्होंने मुझे काम से हटा दिया। अब वे मुझे रिलीविंग लेटर भी नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा, मेरी खिलाफ गलत शिकायत भी कलेक्ट्रेट में कर दी गई है। मैंने जिला कलेक्टर कार्यालय में आवेदन भी दिया है। चौरसिया ने बताया कि डीपीसी शर्मा कह रहे हैं कि उन्होंने मुझे चेक दिया था, जिसे कैश कर लिया गया। यह आरोप पूरी तरह से गलत है। अगर डीपीसी शर्मा ने सच में कोई चेक दिया है, तो उसका सीरियल नंबर बताएं। चौरसिया ने डीपीसी शर्मा की शिकायत लोक शिक्षण आयुक्त और मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के अध्यक्ष से भी की है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें षड्यंत्र के तहत एपीसी पद से हटाया गया।

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यह आवाज डीपीसी शर्मा की... शफीक ने कहा

वायरल ऑडियो में डीपीसी शर्मा शफीक को पैसे देने की बात करते सुनाई दे रहे हैं। जब शफीक से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा- यह आवाज डीपीसी शर्मा की है, लेकिन मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है। मुझे नहीं पता कि किस सरकारी पैसे या रिश्वत की बात हो रही है। मैं इस मामले में सोमवार को कलेक्टर को आवेदन दूंगा। डीपीसी ओपी शर्मा ने गलत तरीके से मेरा नाम लिया है। एक और कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- डीपीसी ओपी शर्मा इसी तरह से कर्मचारियों से पद के बदले पैसे मांगते हैं। वो कहते हैं कि स्कूलों और मदरसों का निरीक्षण कर इसकी भरपाई कर लो।

एक प्रधान अध्यापक भी डीपीसी की शिकायत कर चुके

प्रधान अध्यापक नागेंद्र सिंह पुंढीर ने डीपीसी ओपी शर्मा के खिलाफ राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक को शिकायत की है। उन्होंने 21 अप्रैल 2025 को बीआरसी पद के चयन के लिए एक पत्र भी भेजा है।

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उन्होंने बताया कि भोपाल के फंदा में बीआरसी पद पर काम कर रहे एक कर्मचारी ने खुद को कार्यमुक्त करने का पत्र जिला शिक्षा केंद्र को दिया था। उन्हें 20 फरवरी 2025 को हटा दिया गया। जब पद खाली हुआ, तो मैंने आवेदन किया और चयन सूची में अगला दावेदार था। लेकिन डीपीसी ओपी शर्मा ने नियमों के खिलाफ जाकर अपने करीबी को 14 अप्रैल 2025 को इस पद पर नियुक्त कर दिया। नागेंद्र सिंह ने शिकायती पत्र में कहा कि वे न केवल पात्रता और मेरिट सूची में हैं, बल्कि उनकी आयु 56 वर्ष होने के कारण वे एज एलिजिबिलिटी भी रखते हैं। उनका कहना है कि वरिष्ठता और योग्यता के बावजूद उन्हें जानबूझकर चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया।

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