MP Private College Fraud: जीवाजी यूनिवर्सिटी के बाद 750 निजी कॉलेजों पर लटकी जांच की तलवार, दो हफ्तों में मांगी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के 750 निजी कॉलेजों की जांच होगी। डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन के मुख्य सचिव ने जांच के निर्देश दिए।

department of higher education

MP Private College Fraud: ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के एफिलिएटेड शिवशक्ति कॉलेज झुंडपुरा, में फर्जीवाड़े के बाद अब 750 निजी कॉलेजों की भी जांच होगी। दरअसल, डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन के मुख्य सचिव अनुपम राजन ने प्रदेश के 750 निजी कॉलेजों की जांच करने का निर्देश दिया है। राजन ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दो सप्ताह में राजस्व टीम से कॉलेजों का भौतिक सत्यापन कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इसमें ग्वालियर और चंबल संभाग के 373 कॉलेजों में भी जांच होगी। राजन की इस जांच से उन कॉलेजों का सच सामने आएगा  जो सिर्फ कागजों पर मौजूद हैं। 

जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलगुरू पर फर्जीवाड़े का आरोप

ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु अविनाश तिवारी सहित 17 प्रोफेसरों पर EOW ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। कुलगुरु और प्रोफेसरों पर फर्जी कॉलेज को आर्थिक फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। इसमें जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु अविनाश तिवारी के साथ राजस्थान के बांसवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केएस ठाकुर भी शामिल हैं। जांच के बाद पता चला कि मौके पर झुंडपुरा के  शिवशक्ति कॉलेज का कोई अस्तित्व नहीं था।

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शिवशक्ति कॉलेज ने फर्जी दस्तावेजों पर ली मान्यता 

मुरैना के निजी कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता देने का मामला सामने आने पर भारी विवाद हुआ था। दरअसल मुरैना जिले के शिवशक्ति कॉलेज झुंडपुरा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता प्राप्त की है। इस मामले को लेकर जमकर विरोध हुआ था। फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर स्कॉलरशिप और अन्य लाभ दिलाए जाने का आरोप लगा था। इस मामले में ग्वालियर निवासी अरुण कुमार तिवारी ने एफआईआर दर्ज कराई थी।

इन प्रोफेसरों पर एफआईआर दर्ज

कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी सहित डॉ. एके हल्वे, डॉ. एसके गुप्ता, डॉ. एसके सिंह, डॉ. सीपी शिंदे, डॉ. आरए शर्मा, डॉ. केएस ठाकुर, ज्योति प्रसाद, डॉ. नवनीत गरूड़, डॉ. सपना पटेल, डॉ. एसके द्विवेदी, डॉ. हेमंत शर्मा, डॉ. राधा तोमर, डॉ. आरपी पांडेय, डॉ. एमके गुप्ता, डॉ. निमिषा जादौन, डॉ. सुरेश सचदेवा और डॉ. मीना श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

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