MP का अनोखा गांव: शादी के लिए न दूल्हा बाहर जाता, न दुल्हन आती, जानिए फिर कैसे होता विवाह?

मध्य प्रदेश के चोली गांव में विवाह की अनोखी परंपरा, जहां बारात बाहर नहीं जाती और रिश्ते गांव में ही तय होते हैं। जानिए क्यों है ये गांव खास।

MP का अनोखा गांव: शादी के लिए न दूल्हा बाहर जाता, न दुल्हन आती, जानिए फिर कैसे होता विवाह?

MP village Story : हर गांव की एक कहानी और प्रथा होती है। बदलते समय में जहां लोगों की सोच अब बदल रही हैं वहीं मध्य प्रदेश का एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी वर्षों पुरानी प्रथा निभाई जा रही है। आमतौर पर जब भी शादी की बात शुरू होती है तो आसपास के इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक बात चलाई जाती है। आज कल तो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इसके लिए आ गए हैं। जहां युवक युवती एक दूसरी से खुद बातचीत कर सकते हैं।

अनोखी प्रथा

लेकिन MP के इस गांव में एक अनोखी प्रथा है। जहां कोई भी बारात किसी दूसरे गांव से यहां नहीं आती। इतना ही नहीं दुल्हन भी किसी दूसरे गांव नहीं होती। यहां गांव में ही लड़का-लड़की के रिश्ते तय होते है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं, मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के चोली गांव की। जिसे देवगढ़ और मिनी बंगाल के नाम से भी जाना जाता है। जो अपनी अनूठी विवाह परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।

गांव में रहने वाले यदुवंशी ठाकुर समाज में मुगलकाल से यह परंपरा चली आ रही है कि रिश्ते गांव की सीमा के भीतर ही तय किए जाते हैं। यहां विवाह संबंध के लिए किसी को भी गांव से बाहर नहीं जाना पड़ता। कई महिलाएं ऐसी हैं जिनका मायका और ससुराल एक ही गांव में आमने-सामने हैं।

क्यों है यह परंपरा खास?

इस गांव की यह परंपरा न केवल सामाजिक एकता को मजबूत करती है बल्कि विवाह के खर्च और दिक्कतों को भी काफी हद तक कम करती है। रिश्तेदार पास-पास रहने के कारण आपसी सहयोग भी बेहतर होता है। चोली गांव की यह अनोखी रीत देशभर के लिए एक दिलचस्प और प्रेरणादायक उदाहरण बनती जा रही है, जहां रिश्ते दूर नहीं, दिलों के करीब होते हैं।

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