कहीं वोटों की फसल न चर जाएं गायें ... -

कहीं वोटों की फसल न चर जाएं गायें …

भोपाल. गोवंश को लेकर वोट भुनाने की राजनीति भाजपा तो पहले से करती आई है, लेकिन पिछली बार कमलनाथ सरकार ने भी गो—संरक्षण को लेकर काफी उत्साह दिखाया। भाजपा और कांग्रेस गोवंश को लेकर श्रेय लेने की होड में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इस बार इन राजनीतिक पार्टियों को इस मुदृे पर मुश्किल होने वाली है। आवारा गोवंश को लेकर किसान काफी नाराज है। इस बार उपचुनाव में लोगों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि आवारा पशुओं की व्यवस्था नहीं की गई तो चुनाव में वोटिंग प्रभावित हो सकती है।

कभी यहां तक गायें चराते थे कृष्ण
मध्यप्रदेश—उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती क्षेत्र महाभारतकालीन बताया जाता है। भिंड जिले के एक क्षेत्र का नाम गोहद ही इसलिए पडा क्योंकि यहां तक भगवान कृष्ण गायें चराने के लिए आते थे। यहां गायों को चराने की उनकी हद थी। यूं तो भाजपा लंबे समय से गाय को लेकर राजनीति की है, लेकिन इस समय कई विधानसभा क्षेत्रों के लोग आवारा गोवंश को लेकर नाराज हैं। उनका कहना है कि आवारा गोवंश से उनकी फसल चौपट हो रही है और सरकार इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं देती।

संरक्षण—संवर्धन के प्रति गंभीर नहीं
भिंड क्षेत्र में इस बार लोग वोट मांगने आ रहे नेताओं के सामने इस समस्या को प्रमुखता से रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की राजनीतिक दल गोवंश के नाम पर भावनात्मक बातें तो करते हैं, लेकिन संरक्षण् और संवर्धन के क्षेत्र में कोई ठोस काम नहीं करते। इस समय पूरे प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या विकराल रूप ले चुकी है, लेकिन इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा।

नस्ल सुधार पर नहीं हुआ काम
गोवंश नस्ल सुधार के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर खास काम नहीं हो सका है, जबकि मध्यप्रदेश गोवंश नस्ल सुधार के क्षेत्र में काफी आगे होने का दावा करता है। लोगों का कहना है कि नस्ल सुधार के क्षेत्र में अच्छा काम हो जाए तो गोवंश को लोग खुला नहीं छोडेंगे और फसलों का नुकसान नहीं होगा।

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