MP Board Exam News: एमपी बोर्ड परीक्षा की एक दिन में 45 कॉपी ही जांच सकेंगे शिक्षक, अब इतना मिलेगा पैसा

MP Board Exam News: मंडल ने कॉपी जांचने के लिए शिक्षकों को 10वीं की प्रति कॉपी पर 15 रुपए और 12वीं की प्रति कॉपी पर 16 रुपए का भुगतान करने का निर्णय लिया है।

MP Board Exam News: एमपी बोर्ड परीक्षा की एक दिन में 45 कॉपी ही जांच सकेंगे शिक्षक, अब इतना मिलेगा पैसा

MP Board Exam News: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने इस वर्ष हाई स्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षाओं की कॉपी जांचने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। करीब 41 हजार शिक्षक कॉपी जांचने का कार्य करेंगे, जबकि 10% शिक्षक रिजर्व के तौर पर तैयार रहेंगे। एक शिक्षक को एक दिन में अधिकतम 45 कॉपी ही जांचने की अनुमति होगी। पहले 30 कॉपी जांचने के बाद ही अतिरिक्त 15 कॉपी दी जाएंगी।

मंडल ने कॉपी जांचने के लिए शिक्षकों को 10वीं की प्रति कॉपी पर 15 रुपए और 12वीं की प्रति कॉपी पर 16 रुपए का भुगतान करने का निर्णय लिया है। साथ ही, कॉपी जांचने में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर 100 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

सीसीटीवी और जैमर की सीमित व्यवस्था

इस बार केवल मूल्यांकन केंद्रों पर ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी। हालांकि, परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने की कोई योजना नहीं है। इसके अलावा, करीब 200 संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्रों पर ही जैमर लगाए जाएंगे।

मंडल का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर अधिकारियों के मोबाइल फोन पहले से प्रतिबंधित हैं, इसलिए जैमर की आवश्यकता नहीं है।

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90% से अधिक अंक वाली कॉपियों की दोबारा जांच

माशिमं ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन छात्रों के 90% से अधिक अंक आएंगे, उनकी कॉपियों की दोबारा जांच की जाएगी। इन कॉपियों को विषय शिक्षक के साथ-साथ मुख्य परीक्षक और उप मुख्य परीक्षक भी जांचेंगे। इसके अलावा, मेरिटोरियस छात्रों की कॉपियों की भी पुनः जांच होगी।

मॉडल आंसर के आधार पर होगी जांच

शिक्षकों को कॉपी जांचने के दौरान मॉडल आंसर शीट दी जाएगी, जिसके आधार पर वे छात्रों के उत्तरों का मूल्यांकन करेंगे। साथ ही, नंबरों का टोटल कम से कम दो-तीन बार जांचने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी प्रकार की गलती न हो।

यदि किसी प्रश्न में छात्र ने आंशिक उत्तर दिया है, तो उसे आधे अंक दिए जा सकते हैं। मंडल का मानना है कि इन सख्त नियमों से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को उनके वास्तविक अंक मिल सकेंगे।

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