MP MGNREGA SCAM: मध्यप्रदेश में सरपंच-सचिव की करतूत, मृतकों को मजदूर बताकर निकाली मनरेगा की राशि, अब जाएंगे जेल

भोपाल में बैरसिया जनपद पंचायत से मनरेगा में घोटाला सामने आया है। यहां सरपंच और सचिव ने मृत लोगों को मजदूर बताया और फर्जीवाड़ा कर मनरेगा का पैसा निकाल लिया। अब मामले में जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

MP MGNREGA SCAM: मध्यप्रदेश में सरपंच-सचिव की करतूत, मृतकों को मजदूर बताकर निकाली मनरेगा की राशि, अब जाएंगे जेल

हाइलाइट्स

  • मृतकों को मजदूर बताकर मनरेगा में घोटाला।
  • बैरसिया की ग्राम पंचायत अर्रावती का मामला।
  • सरपंच-सचिव पर धोखाधड़ी की धाराओं में FIR।

Bhopal Bairsia MGNREGA Fraud:  यह सुनकर आप चौंक जाएंगे कि जो लोग इस दुनिया में ही नहीं रहे, वे भी मध्यप्रदेश की एक पंचायत में मनरेगा के तहत 'काम' कर रहे थे! ... जी हां... अजब-गजब एमपी से गजब का घोटाला सामने आया है।

राजधानी भोपाल की बैरसिया जनपद पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मृत लोगों के नाम से फर्जीवाड़ा किया गया। यहां सरपंच और सचिव ने मजदूर बताकर ऐसे लोगों पर मनरेगा राशि निकाल ली, जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। इन मृतकों को कागजों में जिंदा बताकर उनकी काम में उपस्थिति दर्ज कर सरकारी पैसा निकाल लिया गया। पंचायत में इस फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद बैरसिया थाने में सरपंच गंगाराम और सचिव छगनलाल के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है।

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मरे हुए लोगों से करवा दी मजदूरी

मनरेगा में फर्जीवाड़ा का पूरा मामला बैरसिया की ग्राम पंचायत अर्रावती से सामने आया है। जिला पंचायत भोपाल की जांच में खुलासा हुआ है कि सरपंच गंगाराम अहिरवार और सचिव छगनलाल जाटव ने 5 मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाई, मस्टर रोल में उनके नाम दर्ज किए और उनके नाम से सरकारी खजाने से मजदूरी की राशि निकाल ली।

यही नहीं, सरपंच गंगाराम ने तो गजब ही कर दिया, सरपंच ने खुद के नाम से NMMS ऐप पर आईडी बना ली और खुद को ही श्रमिक दिखाकर भुगतान लेता रहा। इस फर्जीवाड़े से न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि मनरेगा जैसी जरूरतमंदों के लिए बनी योजना की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

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4 महीने तक निकाली जाती रही राशि

अर्रावती ग्राम पंचायत में सरपंच गंगाराम अहिरवार और तत्कालीन सचिव छगनलाल जाटव ने पांच मृत व्यक्तियों को जीवित दिखाकर उनके नाम से मजदूरी की रकम निकाल ली। इस घोटाले की शिकायत मिलते ही जिला पंचायत भोपाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर जांच की गई।

जांच में यह साफ हुआ कि बिना किसी वास्तविक निर्माण कार्य के मनरेगा की राशि का भुगतान कर दिया गया। हैरानी की बात ये है कि केवल मृतकों के नाम ही नहीं, कई फर्जी जॉब कार्ड बनाकर और लोगों के नाम भी मजदूरी में जोड़ दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 22 दिसंबर 2023 से 19 अप्रैल 2024 तक इन फर्जी मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर कुल 16,287 रुपए की राशि निकाली गई।

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किस मृतक के नाम पर कितनी राशि निकाली गई

  • चंद्रशेखर पचौरी – ₹5,746
  • गजराज सिंह राजपूत – ₹1,547
  • सोमत सिंह – ₹5,746
  • दुर्गा प्रसाद – ₹1,701
  • शैतान सिंह – ₹1,547

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सरपंच-सचिव के खिलाफ केस दर्ज

इस पूरे मामले में सरपंच और तत्कालीन सचिव पर फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए मनरेगा की राशि हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। जिला पंचायत की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों के खिलाफ पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ने बैरसिया थाने में IPC की धारा 409 (सरकारी धन का गबन), 420 (धोखाधड़ी) और 34 (सामूहिक अपराध) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।

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