MP Arms License: गांधी जयंती तक इन लोगों को करना होगा हथियार सरेंडर, जानें किन पर लागू यह नियम

मप्र में 913 लोगों के पास दो से अधिक हथियार लाइसेंस, गृह विभाग ने 3 अक्टूबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया।

MP Arms License: गांधी जयंती तक इन लोगों को करना होगा हथियार सरेंडर, जानें किन पर लागू यह नियम

हाइलाइट्स

  • गांधी जयंती तक हथियार सरेंडर का आदेश

  • प्रदेश में 913 लोगों के पास दो से अधिक लाइसेंस

  • कोर्ट ने कहा बंदूक रखना मौलिक अधिकार नहीं

MP Arms License: मध्यप्रदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के निर्देश के बाद दो से अधिक लाइसेंसी हथियार रखने वाले व्यक्तियों के लिए बड़ा आदेश जारी किया गया है। गृह विभाग (Home Department) ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि पात्रता से अधिक हथियार लाइसेंस रखने वालों से हथियार सरेंडर कराए जाएं और उनके अतिरिक्त लाइसेंस निरस्त किए जाएं। यह प्रक्रिया 3 अक्टूबर तक पूरी करनी है।

[caption id="attachment_898479" align="alignnone" width="1298"]publive-image प्रदेश में 913 लोगों के पास दो से अधिक लाइसेंस।[/caption]

913 लोगों के पास दो से अधिक लाइसेंस

मप्र में कुल 913 ऐसे लोग हैं जिनके पास दो से अधिक हथियार लाइसेंस हैं। इनमें से 88 लाइसेंस केवल भोपाल शहर में ही हैं। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि द आर्म्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2019 के अनुसार किसी व्यक्ति के नाम पर दो से अधिक हथियार का लाइसेंस नहीं हो सकता। आदेश के अनुसार, पात्रता से अधिक लाइसेंस रखने वाले सभी व्यक्तियों से उनकी अतिरिक्त बंदूकें जमा करवाई जाएंगी।

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मप्र हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये मौलिक अधिकार नहीं

इस आदेश के पीछे मप्र हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच का हालिया फैसला भी अहम है। 10 सितंबर को कोर्ट ने हथियार लाइसेंस मांगने वाली 13 साल पुरानी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बंदूक रखना मौलिक अधिकार नहीं है और यह शासन का विवेकाधिकार है कि किसे लाइसेंस दिया जाए और किसे नहीं।

MP Training Scam: RTI से 48 करोड़ के गबन का खुलासा, स्किल डेवलपमेंट के नाम पर अधिकारियों की निजी एजेंसियों से मिलीभगत

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मध्यप्रदेश में कौशल प्रशिक्षण योजना (Skill Development Scheme) के तहत स्किल डेवेलपमेंट ट्रेनिंग के नाम पर करोड़ो का गबन किया गया। हाल ही में श्रम विभाग से सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई‌ जानकारी से खुलासा हुआ है कि युवाओं को रोजगार के लिए स्कूल ट्रेनिंग के नाम पर निजी एजेंसियों से मिलीभगत कर 48 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। लेकिन न ही ट्रेंनिंग देने वालों के पास इसे लेकर कोई प्रूफ पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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