MP News: मोती मांगे आज़ादी....30 साल से बेड़ियों में कैद हाथी, मानसिक स्थिति बिगड़ने की आशंका

जिले का चिड़ियाघर जहां पिछले 30 साल से मोती नाम का हाथी बच्चों का मनोरंजन कर रहा है। अब पशु प्रेमी इसे आजाद करने की मांग कर रहे हैं।

MP News: मोती मांगे आज़ादी....30 साल से बेड़ियों में कैद हाथी, मानसिक स्थिति बिगड़ने की आशंका

इंदौर। जिले का चिड़ियाघर जहां पिछले 30 साल से मोती नाम का हाथी बच्चों का मनोरंजन कर रहा है। अब पशु प्रेमी इसे आजाद करने की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया में इसे लेकर कैंपेन भी चलाया जा रहा है। आखिर क्या है इसकी वजह देखते हैं इस खास रिपोर्ट में।

आजादी के लिए कैंपेन शुरू

कभी अपना सिर तो कभी सूंड हिलाकर बच्चों का मनोरंजन करने वाले इस हाथी का नाम मोती है। जो फिलहाल चिड़ियाघर के बाड़े में कैद है। पिछले 30 सालों से मोती अपने अलग-अलग अंदाज से बच्चों का मन लुभा रहा है लेकिन अब उसकी हालत पहले जैसी नहीं रही।

बिगड़ रही हाथी की स्थिति

मोदी  नामक हाथी की मानसिक स्थिति बिगड़ रही है। वो खुद को नुकसान पहुंचा रहा है। जिसके चलते एनिमल लिबरेशन फाउंडेशन के सदस्य सुरेश व्यास ने मोती की आजादी के लिए कैंपेन शुरू कर दिया है। दूसरी ओर जू प्रबंधन इस बात को स्वीकार करने को ही तैयार नहीं कि मोती का हालत खराब है और उसे इलाज की जरूरत है। वो इसे हाथियों का सामान्य व्यवहार मान रहा है।

इस दुनिया में आजादी भला किसे प्यारी नहीं होती। पिंजरा और बेड़ियां भले सोने की ही क्यों ना बनी हो। ये किसी ना किसी जानवर की आजादी छिनने का ही काम करते हैं। अगर मोती को आजाद करके उसके स्वास्थ्य में सुधार आ सकता है तो ऐसा बिना देरी किए किया जाना चाहिए।

10 सालों तक बेड़ियों में जकड़ा रहा हाथी

शुरू हो गई है, एनिमल लिबरेशन फाउंडेशन से जुड़े सदस्य लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो और अन्य पोस्ट के माध्यम से मोती की आजादी की मांग कर रहे हैं, एनिमल लिबरेशन फाउंडेशन से जुड़े सुरेश व्यास का कहना है कि हाथी सालों से इसी तरह परेशान है और 10 सालों तक बेड़ियों में जकड़ा रहा है।

मोती दिमागी तौर पर नहीं है स्थिर

मोती की स्थिति इतनी खराब है कि दिमागी तौर पर अपने आप को स्थिर नहीं रख पाता है, जिसके कारण वह लगातार मूवमेंट करता है, दीवारों पर सिर पीटता है, और कई बार जोर-जोर से गर्दन घुमाता है। जिससे उसे शारीरिक तौर पर इंजरी होने का भी खतरा है।

जू प्रबंधन नहीं ले रहा फैसला

ऐसे में जू प्रबंधन को यह कोशिश करनी चाहिए कि मोती को जल्द से जल्द कैद से मुक्त किया जाए जिससे वह अपनी बची हुई जिंदगी भी अच्छे से गुजार सके, वही एनिमल लिबरेशन फाउंडेशन के सदस्य यह भी कहते हैं कि मोती ज़ूकोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित है। जिसके चलते वह अक्सर अपने सिर को जोर-जोर से हिलाता हुआ और खुद को नुकसान पहुंचाता हुआ दिखाई देता है।

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