संसद सत्र की कार्यवाही में हर मिनट खर्च होते है 2.50 लाख रुपये,जानें संसद का सत्र कैसे बुलाया जाता है?

संसद सत्र की कार्यवाही में हर मिनट खर्च होते है 2.50 लाख रुपये,जानें संसद का सत्र कैसे बुलाया जाता है?

हर साल संसद में तीन सत्र लगते हैं। कोई भी दो सत्र के बीच में छः महीने से अधिक समय नहीं होना चाहिए उससे पहले ही तीसरा सत्र बुलाना होता है। जानिए पुरे एक सत्र में कितना खर्च आ जाता है।

Parliament Session: संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई 2022 से शुरू हो गया है। इस सत्र में मोदी सरकार 24 बिल लाने जा रही है तो जाहिर है कि मानसून सत्र हंगामे दार तो होना ही है। मानसून सत्र 8 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा देखने होगा कि इस बार का सत्र कितना हंगामे दार यह यो देखने योग्य रहेगा। क्या आपने कभी सोचा है कि संसद का सत्र क्यों बुलाया जाता है ? आखिर किसकी इजाजत से सत्र को बुलाया जाता है ,कितना खर्च आता है आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

मानसून सत्र कब होता है

सबसे पहले समझते है मानसून सत्र के बारे में मानसून सत्र जुलाई से लेकर 15 अगस्त के बीच में ही होता है। जब भी संसद का कोई सत्र शुरू होता है उससे पहले कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स एक फिक्स समय तय कराती है जब वो कैलेंडर तैयार करती है तो वो कैलेंडर राष्ट्रपति के पास जाता है ,राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद सांसदों को राष्ट्रपति से मिलने को कहा जाता है। साल में तीन सत्र लगाना ही होता है और दो सत्र के बाद तीसरे सत्र को 6 महीने से पहले ही चालू करना होता है।

सत्ता और विपक्ष के लिए कैसे तय होती है जगह?

सत्र के शुरू होने से पहले ही लोकसभा में तय करना होता है कि कौन कहां बैठेगा ये तय करने का अधिकार रहता है चुनाव जीतने वाली पार्टी को रहता है वो अपने हिसाब से सीटों का बंटवारा करती है। प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के सांसदों को स्पीकर के बाएं तरफ की जगह दी जाती है जबकि अन्य पार्टी के सासंद दाईं तरफ की जगह दी जाती है। पार्टी अपने सांसदों का सिटिंग अरेंजमेंट अपने हिसाब से करती है कौन कहां बैठेगा पार्टी वरिष्ठ सदस्यों के आधार पर तय करती है।

एक घंटे में इतने करोड़ होते है खर्च

संसद की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हो जाती है और शाम 6 बजे तक चलती है। इसमें एक घंटे का भोजन के लिए समय रखा जाता है एक बजे से दो बजे तक लंच टाइम रहता है। शनिवार और रविवार को कार्यवाही बंद रहती है। अगर कोई सत्र चल रहा है उस दौरान जो भीत्योहार या अन्य जयंती हो तो उसका भी अवकाश भी हो सकता हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार संसद के हर घंटे की कार्यवाही पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते है। अगर प्रति मिनिट खर्च की बात करे तो करीब ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं। सचिवालय के कर्मचारियों के वेतन और सांसदों की सुविधाओं पर खर्च होता है। ऐसे में जब हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही स्थगित होती है तो उस हर गुजरते एक मिनट के साथ आम जनता के टैक्स के पैसों का ढाई लाख खर्च होता है।

 

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