मोदी ने एक क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान के अन्‍य क्षेत्र में इस्‍तेमाल, नवाचार को संस्‍थागत रूप देने का किया आह्वान

नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को एक क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान के अन्‍य क्षेत्र में इस्‍तेमाल और नवाचार को संस्‍थागत रूप देने का आह्वान किया ताकि वैज्ञानिकों के कार्यों का विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सके।

अनुसंधान की महत्ता के विभिन्न आयामों को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि इसका प्रभाव ‍सामाजिक या व्‍यावसायिक हो सकता है लेकिन अनुसंधान जानकारी और समझदारी का भी विस्‍तार करता है।

मोदी यहां वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से राष्ट्रीय माप पद्धति सम्मेलन में वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय परमाणु समयमापक (नेशनल एटॉमिक टाइमस्‍केल) और भारतीय निर्देशक द्रव्य को भी राष्ट्र को समर्पित किया और राष्ट्रीय पर्यावरण संबंधी मानक प्रयोगशाला की आधारशिला भी रखी।

उन्होंने कहा, ‘‘अनुसंधान की भावी दिशा और उसके उपयोग के साथ ही उसके अंतिम लक्ष्‍य के बारे में पहले से अनुमान लगा पाना हमेशा संभव नहीं हो पाता। सिर्फ एक ही चीज तय होती है, वह है कि अनुसंधान नई से नई जानकारी के आयाम खोलता है और यह कभी बेकार नहीं जाता।’’

प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में जैनेटिक्‍स के जनक मेंदेल और निकोलस टेस्‍ला का उदाहरण दिया, जिनके कार्य को बहुत बाद में मान्‍यता मिली।

उन्‍होंने कहा कि बहुत बार ऐसा होता है कि अनुसंधान तात्‍कालिक लक्ष्‍यों को पूरा नहीं कर पाए लेकिन यही अनुसंधान कुछ अन्‍य क्षेत्रों में बेहद महत्‍वपूर्ण हो सकता है।

इसकी व्‍याख्‍या करते हुए उन्होंने जगदीशचंद्र बोस का उदाहरण दिया जिनकी माइक्रोवेव थ्‍योरी उनके समय में व्‍यावसायिक दृष्टि से लाभप्रद नहीं हो सकी लेकिन आज समूची रेडियो दूरसंचार सेवा उसी पर आधारित है।

उन्‍होंने विश्‍व युद्धों के दौरान हुए अनुसंधानों का भी उदाहरण दिया जिन्‍होंने बाद में विभिन्‍न क्षेत्रों में क्रान्ति की।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘ड्रोन्‍स को युद्ध के लिए तैयार किया गया था लेकिन आज वे न सिर्फ फोटोशूट कर रहे हैं बल्कि सामानों को पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री कहा, ‘‘युवा वैज्ञानिकों को अपने क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधानों का उपयोग अन्‍य क्षेत्रों में किए जाने की संभावनाओं को तलाशना चाहिए और इसे सामने रखकर ही अपना अनुसंधान करना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा कि कैसे कोई छोटा सा अनुसंधान भी विश्‍व को बदल सकता है, इसका सबसे अच्छा उदाहरण बिजली है। आज सब कुछ बिजली से चलता है, चाहे वह परिवहन हो, संचार हो, उद्योग हो या हमारा रोज का जीवन।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह से सेमी कंडक्‍टर्स जैसे आविष्‍कारों ने हमारे जीवन में डिजीटल क्रांति ला दी है। हमारे युवा अनुसंधानकर्ताओं के सामने बहुत सी संभावनाएं हैं। उनके अनुसंधान और आविष्‍कारों से हमारा भविष्‍य पूरी तरह बदल सकता है।’’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान भविष्‍य के लिए ईको सिस्‍टम बनाने के प्रयासों की भी चर्चा की।

उन्‍होंने कहा कि भारत वैश्विक नवाचार रैंकिंग में सर्वोच्‍च 50 देशों में शामिल हैं और साथ ही विज्ञान एवं इंजीनियरिंग प्रकाशन के मामले में भी तीसरे स्थान पर है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा जोर आधारभूत अनुसंधान पर है। उद्योगों और संस्‍थानों के बीच समन्‍वय सुदृढ़ हुआ है और विश्‍व की बड़ी कंपनियां भारत में अपने अनुसंधान प्रकोष्‍ठ स्‍थापित कर रही हैं। हाल के वर्षों में इस तरह के अनुसंधान प्रकोष्‍ठों की संख्‍या में पर्याप्‍त वृद्धि हुई है।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय युवा के लिए अनुसंधान और नवोन्‍मेष की संभावनाएं असीमित हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए नवोन्‍मेष का संस्‍थागत होना उतना ही महत्‍वपूर्ण है जितना कि नवोन्‍मेष खुद महत्‍वपूर्ण है। हमारे युवाओं को यह समझना होगा कि बौद्धिक संपदा की रक्षा कैसे की जाए। हमें यह याद रखना होगा कि हमारे जितने अधिक पेटेंट्स होंगे उतनी ही उनकी उपयोगिता होगी। उन क्षेत्रों में हमारी उपस्थिति और पहचान सुदृढ़ होगी जिनमें अनुसंधान मजबूत और नेतृत्‍वकारी होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे हम एक सुदृढ़ ‘ब्रांड इंडिया’ की ओर बढ़ सकेंगे।

वैज्ञानिकों को कर्मयोगी बताते हुए उन्होंने प्रयोगशालाओं में उनके पूरे मनोयोग से काम में लगे रहने की प्रशंसा की और कहा कि वे 130 करोड़ भारतवासियों की उम्‍मीदों और आकांक्षाओं के वाहक हैं।

भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र उमा

उमा

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