रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी, परमाणु हादसों से निपटने के लिए मॉक ड्रिल होगा :एनडीआरएफ डीजी

(नीलाभ श्रीवास्तव)

नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) एनडीआरएफ प्रमुख ने कहा है कि भारत मानव जनित एवं प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी के तहत 2023 तक अपने 740 जिलों में एक बड़ा अभ्यास करेगा, जिस दौरान रासायनिक,जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु (सीबीआरएन) हमलों या दुर्घटनाओं से निपटने पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को 2020-21 से शुरू हो रहे तीन वित्तीय वर्षों में इस बहु-एजेंसी अभ्यास के प्रथम चरण को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

एनडीआरएफ के महानिदेशक एस एन प्रधान ने पीटीआई-भाषा से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘आधुनिक समय की मानव जनित आपदा सीबीआरएन आपदाएं होंगी। यह बहुत जरूरी है कि उससे निपटने के लिए तैयारी की जाए…क्योंकि यह एक अपरिचित क्षेत्र है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हम अधिक से अधिक बिजली पैदा करने के लिए परमाणु माध्यम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए ये सभी उस एजेंडा में जुड़ते हैं, जो सीबीआरएन के प्रति लक्षित होगा। ’’

उन्होंने कहा कि सीबीआरएन चुनौती की प्रकृति ही कुछ ऐसी है कि शायद कोई भी सभी तरीकों से इससे निपटने के लिए सचमुच में तैयार नहीं हो सकता क्योंकि ऐसी ज्यादा दुर्घटनाएं नहीं हुई हैं, जिनमें बचावकर्मियों एवं विशेषज्ञों को लगाया गया हो तथा इसके खिलाफ उनमें कौशल का विकास हुआ हो।

उन्होंने कहा, ‘‘हां, सीबीआरएन चुनौतियों का हमने उस तरह से नहीं सामना किया है…विशाखापत्तनम में हाल में हुई रासायनिक गैस रिसाव जैसी कुछ घटनाएं हुई हैं और हम इससे दक्षता से निपट सकें, लेकिन रियल-टाइम तैयारी (सीबीआरएन आपदाओं के लिए) शायद व्यवहार्य नहीं है, जैसा कि हम चक्रवात और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयारी कर सकते हैं। ’’

उल्लेखनीय है कि पिछले साल मई में विशाखापत्तनम में हुई इस घटना में करीब 11 लोग मारे गये थे, जबकि सैकड़ों अन्य प्रभावित हुए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘देश में सीबीआरएन आपदाओं से निपटने के लिए एनडीआरएफ के अग्रिम मोर्चे की संस्था होने के नाते यह इस देशव्यापी अभ्यास के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रही है। ’’

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने बल को देश के करीब 740 जिलों में तीन साल में कम से कम एक ‘मॉक ड्रिल’ करने का निर्देश दिया है, जो सीबीआरएन के प्रति लक्षित हो।

उन्होंने बताया कि कुल जिलों में से एक तिहाई को प्रति वित्त वर्ष शामिल किया जाएगा।

प्रधान ने कहा कि एजेंसी ने 2020-21 में करीब 40-50 प्रतिशत जिलों को कवर किया, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सका।

उन्होंने कहा, ‘‘टीके के आ जाने पर, हम मौजूदा वित्त वर्ष का लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे और अगला लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के अंदर पूरा किया जाएगा।’’

एनडीआरएफ महानिदेशक ने बताया कि इन अभ्यासों में जिले के विभिन्न हितधारकों, जैसे कि स्वास्थ्य सेवा, पुलिस, प्रशासन, दमकल सेवा, स्वयंसेवी संगठन एवं अन्य को शामिल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मान लें कि किसी जिले में एक बड़ा रासायनिक संयंत्र या परमाणु संयंत्र या पाइपलाइन ग्रिड है, तो अभ्यास के केंद्र में वही रहेगा।

भाषा

सुभाष नरेश

नरेश

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