Mental Disorder : कहीं आप या आपके परिजन इस मेन्टल डिसऑर्डर का शिकार तो नहीं

Mental Disorder : कहीं आप या आपके परिजन इस मेन्टल डिसऑर्डर का शिकार तो नहीं

Mental Disorder : 40 वर्षीय शिखा को उसके पति मनोचिकित्सक के पास लेकर आते हैं। पति का कहना है कि घर की चीजों को अपने हिसाब से क्रम में रखना अनिवार्य सा बन चुका है। जैसे ही चीजें अव्यवस्थित हो जाती हैं, पत्नी काफी नाराज हो जाती है, झगड़ा करती है। जिंदगी के अन्य कई हिस्सों में वह खुद काफी अव्यवस्थित है और उससे वह परेशान नहीं होती। विश्लेषण किए जाने पर शिखा ने कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करे, तो उसके मन में उलझन सी होती रहती है। उसने स्वीकार किया कि उसके कई आवश्यक कार्य इस वजह से समय पर नहीं हो पाते। पिछले 25 साल की वैवाहिक जिंदगी में कई बार पति के साथ ये बातें झगड़े का कारण भी बनीं। पुरानी चीजों को फेंकनें में भी उसे संदेह बना रहता है। परिवार के दूसरे सदस्यों में भी इस समस्या के कई लक्षण सामने आए।

उपरोक्त उदाहरण में शिखा ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (Mental Disorder) (ओसीडी) से पीडि़त हैं। इसे समझने के लिए हमने सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बात की।

डॉ त्रिवेदी कहते हैं कि यह किसी भी व्यक्ति (महिला, पुरुष, बच्चे, वृद्ध) को किसी भी उम्र में हो सकती है। तकरीबन 70 प्रतिशत लोगों को यह समस्या 25 की उम्र के पहले शुरू हो जाती है। जब कोई विचार, चित्र, आशंका हमारे मन में बार-बार आए, तो इन्हें ऑब्सेशन्स कहा जाता है और जब इनके प्रभाव में वह कार्य करने/ उस विचार के अधीन सोचने पर विवश होते हैं, तो उन्हें कम्पल्शन कहा जाता है। हालांकि कई मामलों में मरीज को अपनी समस्या का भान नहीं होता, जो कि समस्या के गंभीर होने का संकेत होता है। ऑब्सेशन्स कई प्रकार के हो सकते हैं- जैसे कि गंदगी लगने का भय रहना, देवी-देवताओं के प्रति गंदे विचार आना, विपरीत लिंगी के प्रति अश्लील विचार आना, अपशब्द बोले जाने का भय, शंका रहना कि काम सही से हुआ है या नहीं, चीजों को एक निश्चित तरीके से ही करना। डॉ सत्यकांत ने कम्पल्शन के कुछ आम उदाहरण बताए जैसे कि – हाथ को बार-बार धोना, ताले बार-बार चेक करना, गैस/दरवाजे के बंद होने को बार-बार चेक करना, चीजों को बार-बार व्यवस्थित रखने का मेंटल कम्पल्शन, बार-बार आश्वासन मांगना इत्यादि।

कारणों और इलाज़ की बात करें तो इस बीमारी के कारणों को लेकर बहुत सा शोध हुआ है। ऐसे मामलों में आनुवंशिक कारणों की महती भूमिका प्रामाणिक है। न्यूरोकेमिकल जैसे सेरोटोनिन के असंतुलित होने को एक बड़ा कारण माना गया है। इसके साथ ही अन्य मानसिक बीमारियों जैसे ऑब्सेसिव कंपल्सिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, ऐंगजाइटी डिसऑर्डर, फोबिया, बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर (Mental Disorder) तथा डिप्रेशन पाया जाना सामान्य है। ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (Mental Disorder) का प्रभावी इलाज संभव है, लेकिन कलंक का भाव एवं जागरूकता का अभाव हमें वर्षों तक इस समस्या का सही समाधान मिलने से वंचित रखता है।

डॉ सत्यकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक हैं और ओसीडी का उपचार करने विशेष रुचि रखते हैं।

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