MDMC Primary school: दुनिया के सबसे अच्छे विद्यालयों में आया भारत के स्कूल का नाम

MDMC Primary school: दुनिया के सबसे अच्छे विद्यालयों में आया भारत के स्कूल का नाम

MDMC Primary school

नयी दिल्ली: हर बच्चे पर ध्यान देना, सहभागिता आधारित शिक्षण और बच्चों तथा उनके माता-पिता के साथ शिक्षकों का अच्छा तालमेल आदि कुछ विशेषताएं हैं, जो दिल्ली के लाजपत नगर स्थित एसडीएमसी प्राइमरी विद्यालय(MDMC Primary school) को सबसे अलग करती हैं। इस विद्यालय ने हाल ही में दुनियाभर से चयनित 10 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों की फेहरिस्त में जगह बनाई है। प्रधानाचार्य निवास तिवारी ने कहा कि उनके विद्यालय की ताकत विविधता है, जहां फिलहाल 583 बच्चे पढ़ते हैं और 12 स्थायी शिक्षक पढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में सभी वर्गों और जाति के बच्चे विद्यालय में पढ़ते हैं। प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि सभी विद्यार्थियों को सभी सुविधाएं मिलें और यह अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के लिए बच्चों के माता-पिता के साथ मिलकर काम करते हैं।तिवारी ने कहा, ‘‘हमारे यहां रिक्शा चलाने वालों, दिहाड़ी मजदूरों और झोंपड़ी में रहने वाले लोगों के बच्चे हैं। हम भेदभाव नहीं करते हैं। हर बच्चे का ख्याल रखा जाता है।’’ समाज की प्रगति में स्कूलों के महत्वपूर्ण योगदान पर समारोह मनाने के लिए ब्रिटेन में शुरू की गई 2,50,000 अमेरिकी डॉलर राशि के पुरस्कार के लिए विश्व के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों का विभिन्न श्रेणियों के तहत चयन किया गया। विभिन्न वर्गों में दुनिया के शीर्ष 10 विद्यालयों की सूची में भारत के पांच प्रेरणादायी विद्यालयों को बृहस्पतिवार को शामिल किया गया। मुंबई स्थित एसवीकेएम के सीएनएम स्कूल और दिल्ली के लाजपत नगर-3 स्थित एसडीएमसी प्राइमरी स्कूल को नवोन्मेष वर्ग में 10 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों की सूची में जगह दी गई है।

तिवारी ने आगे अपने स्कूल(MDMC Primary school) की सफलता का श्रेय कर्मचारियों और छात्रों के बीच समन्वय और संचार को दिया। तिवारी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाता है कि विद्यार्थी विद्यालय में घर जैसा महसूस करें। उन्होंने कहा कि हम किसी भी तरह की शारीरिक सजा नहीं देते, लेकिन फिर भी विद्यार्थी अनुशासित हैं। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि कोई भी बच्चा सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि के कारण पीछे न रहे। तिवारी ने बताया कि बच्चे शिक्षकों से डरे नहीं, इसके लिए शिक्षक उनके साथ भेजन करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के माता-पिता और शिक्षकों के बीच महीने में एक बार चर्चा होती है। इसके अलावा माता-पिता के साथ अक्सर ‘चाय पे चर्चा’ का आयोजन किया जाता है। ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ स्कूल पुरस्कार’ के विजेताओं की घोषणा इस साल अक्टूबर में विश्व शिक्षा सप्ताह में की जाएगी। इस दौरान 2,50,000 अमेरिकी डॉलर के पुरस्कार को पांच विजेताओं के बीच समान रूप से वितरित किया जाएगा। हर विजेता स्कूल को 50,000 अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार प्राप्त होगा।

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