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MCU नियुक्ति मामला: कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रोफेसर की ज्वाइनिंग नहीं की निरस्त, HC में दायर हो सकती है अवमानना याचिका

MCU Bharti Vivad: यूनिवर्सिटी ने आदेश के 5 दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक दोनों रीडरों की नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश जारी नहीं किया है.

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Rohit Sahu
MCU नियुक्ति मामला: कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रोफेसर की ज्वाइनिंग नहीं की निरस्त, HC में दायर हो सकती है अवमानना याचिका

MCU Bharti Vivad: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार 25 अप्रैल को माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (MCU) को लेकर अहम फैसला सुनाया था. कोर्ट ने पदस्थ रीडर संजय द्विवेदी और पवित्र श्रीवास्तव की नियुक्ति को नियम विरुद्ध पाते हुए निरस्त कर दिया था. यूनिवर्सिटी ने आदेश के 5 दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक दोनों रीडरों की नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश जारी नहीं किया है. बल्कि दोनों प्रोफेसरों को छुट्टी पर भेज दिया है.

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विवादों में MCU ‘अभिमत या स्टे का इंतजार’

मामले में यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तरफ से कोर्ट के आदेश के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया है. जिस कारण MCU विवादों में आ गई है. यूनिवर्सिटी आदेश के अध्ययन करने और वकील से अभिमत लेने का हवाला दे रही है. जबकि कोर्ट ने इस मामले में तुरंत दोनों रीडरों की न्युक्ति निरस्त करने और नई भर्ती का नोटिफिकेशन जारी करने का आदेश दिया था. आज 5 दिन बाद भी नियुक्ति निरस्त नहीं की गईं हैं.

‘यूनिवर्सिटी प्रबंधन कर रहा कोर्ट की अवमानना’

MCU Bharti Vivad

याचिकाकर्ता की ओर से वकील नित्यानंद मिश्रा ने कहा कि न्यायालय के आदेश की व्याख्या करने का अधिकार विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं है, न्यायालय द्वारा जिन प्रोफेसर की सेवाएं समाप्त की गई हैं उनको छुट्टी में भेजना न्यायालीन अवमानना की श्रेणी में आता है, विश्वविद्यालय प्रशासन अगर आदेश से संतुष्ट नहीं है तो उन्हें अपील करना चाहिए.

‘कुलपति बोले आदेश का अध्ययन कर रहे’

MCU Bharti Vivad

एमसीयू के कुलपति केजी सुरेश ने कहा कि कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं. लीगल एक्सपर्ट से इस पर अभिमत लिया जा रहा है. उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। अभी प्रोफेसर छुट्टी पर है. स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद वे वापस आएंगे.

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ये है पूरा मामला

संजय द्विवेदी और पवित्र श्रीवास्तव की नियुक्ति 2009 में हुई थी. दरअसल चयन समिति में (HOD) को शामिल न करने को लेकर यह नियुक्ति अवैध पाई गई थी. नियुक्ति के समय जनसंचार और जनसंपर्क एवं विज्ञापन विभाग के HOD को कमेटी और इंटरव्यू पैनल में शामिल नहीं किया गया था. जो माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय अधिनियम 1990 की धारा 33(2)(डी) के अनुसार अनिवार्य था.

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