DAVV इंदौर पेपर लीक मामले में खुलासा: अक्षय बम के कॉलेज से ही लीक हुआ था MBA का पर्चा; 3 लोग गिरफ्तार

Indore  News: DAVV इंदौर पेपर लीक मामले में खुलासा: अक्षय बम के कॉलेज से ही लीक हुआ था MBA का पर्चा; 3 लोग गिरफ्तार

DAVV इंदौर पेपर लीक मामले में खुलासा: अक्षय बम के कॉलेज से ही लीक हुआ था MBA का पर्चा; 3 लोग गिरफ्तार

हाइलाइट्स

  • DAVV इंदौर पेपर लीक मामले में खुलासा
  • कई वाट्सएप ग्रुपों की जांच-पड़ताल की
  • अक्षय बम के कॉलेज से लीक हुआ था पेपर

Indore  News: इंदौर के देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में MBA के पेपर लीक मामले में 11 दिन बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, एमबीए का पेपर अक्षय बम के कॉलेज से ही लीक हुआ था।

मामले में आयडलिक कॉलेज के ऑपरेटर दीपक सोलंकी को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही 2 छात्रों को भी गिरफ्तार किया है।

थ्री इडियट्स फिल्म की तर्ज पर वारदा को अंजाम दिया था। आरोपियों पर पेपर चुराकर 2 हजार रुपए में बेचने का आरोप है।

https://twitter.com/BansalNewsMPCG/status/1799345366304793025

आपको बता दें कि पेपर को चुराकर छात्र ने अपने साथी को वाट्सएप पर भेजा था। इसके बाद वायरल हुआ था। पुलिस ने दोनों छात्रों को भी गिरफ्तार किया है।

जिस आयडलिक कॉलेज के ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है, उसके डायरेक्टर हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए अक्षय कांति बम हैं।

कई वाट्सएप ग्रुपों की जांच-पड़ताल

28 मई को यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित MBA की बैच का अकाउंटिंग फॉर मैनेजर्स विषय का पेपर परीक्षा के 26 घंटे पहले लीक हो गया था। यूनिवर्सिटी ने तत्काल एग्जाम कमेटी की बैठक बुलाकर परचा निरस्त कर दिया था।

इसके बाद जांच के लिए एडिशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा, एसीपी तुषार सिंह और टीआई उमेश यादव की स्पेशल टीम गठित की गई थी।

टीम ने यूनिवर्सिटी की प्रिंटिंग प्रेस से तैयार किए गए पेपर से लेकर कॉलेज तक पहुंचने की पूरी चेन को समझा और फिर 24 से ज्यादा वाट्सएप ग्रुपों में वायरल हुए पेपर की पड़ताल कर आयडलिक कॉलेज के छात्र धीरेंद्र नरवरिया को पकड़ा।

धीरेंद्र कॉलेज में MBA फर्स्ट सेमेस्टर का स्टूडेंट है। उससे जानकारी मिली कि उसके पास ये पेपर छात्र गौरव सिंह गौर के जरिए आया था।

8 हजार में हुआ सौदा तय, 2 हजार दिए और ले लिया पेपर

गौरव ने के मुताबिक, उसने दीपक से संपर्क किया तो दीपक ने 8 हजार रुपए की मांग की थी। इस पर उसने 2 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर पेपर ले लिया था। इसके साथ ही दीपक ने ये भी कबूला कि कॉलेज प्रिंसिपल के ऑफिस में CCTV कैमरे नहीं थे।

जिस कबर्ड में पेपर के बंडल रखे जाते थे, उसकी चाबी प्रिंसिपल के ड्रावर में ही रहती थी। शाम को स्टाफ के जाने के बाद उसने बंडल निकाला और स्कैल की मदद से सील उचकाकर पेपर निकाला और फिर वापस वैसे सा वैसा रख दिया।

कमेटी कर रही जांच-पड़ताल

कमेटी मामले की जांच-पड़ताल में जुटी हुई है। इस कमेटी में लोकपाल नरेंद्र सत्संगी, डीसीडीसी डॉ. राजीव दीक्षित, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. सुधा सिलावट, और डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. एलके त्रिपाठी शामिल हैं।

कॉलेज डायरेक्टेर अक्षय बम ने ये कहा

मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं पता करके बात करता हूं।

डीएवीवी रजिस्ट्रार डॉ. अजय वर्मा ने ये कहा

पेपर लीक मामले में यदि कॉलेज की भूमिका मिली तो उसकी संबद्धता ही निरस्त की जाएगी। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो, उसके लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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