Badal Singh Chandel: नागदा के शहीद को विदाई देने उमड़ा जनसैलाब, राजकीय सम्मान के साथ की अंत्योष्टि…

उज्जैन। प्रदेश के उज्जैन जिले में आने वाली तहसील नागदा के शहीद जवान बादल सिंह चंदेल की शनिवार को अंतिम यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में जनसैलाब उमड़ा। शहीद जवान का पार्थिव शरीर आज सुबह नागदा लाया गया। इसके बाद नगरवासियों ने अपने नगर के वीर जवान को अंतिम विदाई दी। करीब एक घंटे के दर्शनों के बाद शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए मुक्तिधाम पहुंची। यहां जवान की गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई।

शहीद बादल के पिता ने नम आंखों से कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। जवान के घर रामसहाय मार्ग स्थित निवास पर एक घंटे अंतिम दर्शन के बाद अंतिम यात्रा नपा, पुराने बस स्टैंड, शासकीय अस्पताल चौराहा, महात्मा गांधी मार्ग, थाने चौराहे से चंबल मार्ग होते हुए मुक्तिधाम पहुंची। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बता दें कि इस यात्रा में भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ा था। नगरवासियों ने शहीद जवान को अंतिम विदाई दी।

सियाचिन पर बर्फ धंसने से हुई थी मौत…
प्रदेश के उज्जैन जिले में आने वाली नागदा तहसील का जवान बादल सिंह चंदेल बीते बुधवार को शहीद हो गया था। नागदा निवासी सेना के जवान बादल सिंह चंदेल सिक्किम के सियाचिन ग्लेशियर में तैनात थे। समुद्र तल से 27 हजार फीट ऊपर ग्लेशियर पर तैनात चंदेल बीती रात बर्फ धंसने से उसकी चपेट में आ गए और शहीद हो गए। बादल सिंह 2004 में सेना में भर्ती हुए थे। बादल की पहली पोस्टिंग रानीखेत में हुई थी। शहीद बादल सिंह शांति सेना में शामिल होकर ढ़ाई साल तक दक्षिण अफ्रीका में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 15 कमाऊं रेजीमेंट के नायक बादल सिंह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और तीन साल के बेटे को छोड़ गए हैं।

हाल ही में बादल सिंह अपने घर नागदा भी आए थे। बीती 13 फरवरी को ही बादल सिंह ने अपनी ड्यूटी ज्वाइन की थी। बादल सिंह की शहादत पर घर में सन्नाटा पसर गया है। वहीं माता-पिता, और पत्नी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गुरुवार को ग्लेशियर में मौजूद सूबेदार प्रताप सिंह ने सेना की यूनिट को जवान की शहादत की खबर दी थी। इसके बाद शहीद को नीचे लाया गया। गौरतलब है कि बादल का विवाह 2017 में ही हुआ था। बादल का एक साढ़े तीन साल का बेटा भी है। बता दें कि शहीद बादल सिंह अपनी 17 साल की सेवाएं सेना को दे चुके थे। बीते 31 दिसंबर को उनका कार्यकाल पूरा भी हो चुका था। हालांकि उन्हें सेना द्वारा एक्सटेंशन देकर प्रमोट किया गया था और सियाचिन में ड्यूटी लगाई गई थी।

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