हाईकोर्ट की अवमानना में शिक्षा विभाग अव्वल: 10 हजार कैंडिडेट ने लगा रखी हैं 200 याचिकाएं, अब सरकार ने उठाया ये कदम

High Court Education Case: बच्चों को अनुशासन और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाला शिक्षा विभाग ही आज्ञाकारी नहीं है। ।

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High Court Education Case: हाईकोर्ट की अवमानना में स्कूल शिक्षा विभाग अव्वल है। सरकारी विभागों के जो केस कोर्ट पहुंच रहे हैं, उनमें आधे तो शिक्षा विभाग के ही हैं।

विभाग इससे कोई सीख नहीं ले रहा है, जिसके कारण कोर्ट में दनादन याचिकाएं लग रही है और सरकार पर बोझ बढ़ रहा है। एमपी हाईकोर्ट जबलपुर में अकेले भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर 10 हजार कैंडिडेट्स ने 200 ने अधिक याचिकाएं लगा रखी हैं।

हर भर्ती में है विवाद

मध्य प्रदेश में हर शिक्षक भर्ती में विवाद है। 2018 और उसके बाद हुई परीक्षा और भर्ती को लेकर जो स्थिति बनी उससे ऐसा लगता है मानो स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी खुद उम्मीदवारों को कोर्ट जाने की नसीहत दे रहे हो।

हालांकि जो मामले कोर्ट पहुंच रहे हैं उनमें भर्ती विवाद के अलावा समयमान वेतनमान, प्रमोशन, निलंबन बहाल होने के बाद भी नौकरी पर नहीं लेने, बहाल होने पर निलंबन अवधि का पैसा नहीं दिए जाने जैसे मामले भी कोर्ट पहुंच रहे हैं।

अधिकारियों पर खड़े हो रहे सवाल

पूरे मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रवैये पर ही सवाल है। लाखों की सैलरी लेने वाले इन अधिकारियों से न तो शिक्षकों से जुड़े विवाद सुलझ पा रहे हैं और ना ही एक भी भर्ती बिना विवादों के पूरी करवा पा रहे हैं।

इसमें तर्क ये आ सकता है कि अधिकारी किसी को कोर्ट जानें से नहीं रोक सकते। बिल्कुल सही भी है, लेकिन बीते 10 महीने में भर्ती विवाद से जुड़े मामले में कोर्ट का एक भी ऐसा डिसीजन सामने नहीं आया जब कैंडिडेट की याचिका को गलत और अधिकारियों की कार्रवाई को सही माना हो।

इनके रवैये से हाईकोर्ट तक को ये कहना पड़ा

1-उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती में 15 फरवरी को गोलमोल जवाब देने पर हाईकोर्ट ने कटनी जिला शिक्षा अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप लोग क्या सोच रहे हैं, कोर्ट जो है बिल्कुल भांग खाकर बैठ रहे हैं।

2-वर्ग 1 शिक्षक भर्ती मामले में 23 फरवरी को सुनवाई के दौरान सही जवाब नहीं देने पर हाईकोर्ट ने डीपीआई कमिश्नर को लेकर कहा कि उनको बोले कि वे इंग्लिश की क्लास लगा लें। पढ़ लें, गलत जवाब न दिया करें।

ये एक जजमेंट ही आईना दिखाने के लिए काफी

उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती (MP Teacher Bharti) 2018 के 848 EWS उम्मीदवारों को 45 दिनों में भर्ती देने के आदेश दिये। आदेश का पालन नहीं होने तक नई भर्ती पर रोक लगा दी। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा ये हुआ कि 7591 पदों पर वर्ग-1 की नई भर्ती पर रोक लग गई।

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मामला यही खत्म नहीं हुआ, विभाग ने सिंगल बेंच के इस ऑर्डर को डबल बेंच में चैलेंज कर दिया, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। नई भर्ती पर अब भी रोक बरकरार है। मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर को होना है।

शिक्षक भर्ती से जुड़े ये केस हाईकोर्ट में पेंडिंग

शिक्षक भर्ती (MP Teacher Bharti) से जुड़े Ews उम्मीदवारों के 21 केस, Obc आरक्षण से जुड़े 17 केस, मेरिटोरियस के 15 केस, माध्यमिक शिक्षक यानी वर्ग 2 के 12 केस, 13% होल्ड सीटों को लेकर 39 केस, सहित अन्य मामलों में 1450 से अधिक याचिकाकर्ताओं ने केस लगा रखे हैं।

इन मामलोंं को लेकर भी हाईकोर्ट में लगे केस

बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाला शिक्षा विभाग ही आज्ञाकारी नहीं है। हाई कोर्ट द्वारा जारी आदेशों का पालन नहीं करने में विभाग अव्वल है।

शिक्षकों द्वारा समयमान वेतनमान, प्रमोशन, निलंबन बहाल होने के बाद भी नौकरी पर नहीं लेने, बहाल होने पर निलंबन अवधि का पैसा नहीं दिए जाने के मामलों में हाई कोर्ट ने आदेश दे रखे हैं, लेकिन विभाग इन आदेशों का पालन नहीं करता। नतीजा प्रमुख सचिव, आयुक्त के खिलाफ शिक्षकों ने अवमानना के मामले लगा रखे हैं।

अधिकारियों के रवैये से कोर्ट में लग रही याचिकाएं

हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज तिवारी ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय में अधिकारी सालों से जमे बैठे हैं। ये किसी की कुछ सुनने को तैयार नहीं। खुद को अंतिम सत्य मानकर बैठे हैं।

यही कारण है कि मजबूरी में उम्मीदवारों को न्याय के लिए कोर्ट जाना पड़ रहा है। पूर्व के कुछ अधिकारियों के अड़ियल रवैया का भी विभाग को खामियाजा उठाना पड़ा।

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मंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं सच्चाई

स्कूल शिक्षा विभाग मंत्री राव उदय प्रताप सिंह खुद सच्चाई स्वीकार कर चुके हैं। पूर्व में बंसल न्यूज डिजिटल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा था कि हाईकोर्ट में सरकार के विरुद्ध जितने केस हैं उनमें आधे अकेले शिक्षा विभाग के हैं और इनकी संख्या हजारों में है। यह एक बड़ा चिंता का विषय है।

मंत्री उदय प्रताप ने तब ये भी कहा था कि सरकार ने ये निर्णय लिया है कि हाईकोर्ट के ऐसे डिसीजन जिसमें कहीं कोई पॉलिसी मेटर नहीं आएगा सरकार उन आदेशों के विरुद्ध अपील नहीं करेगी। हालांकि मंत्री के इस बयान के बाद भी अपील की गई, जिसका नतीजा वर्ग 1 शिक्षक भर्ती 2023 अटक गई है।

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14 अक्टूबर को सरकार करेगी समीक्षा

स्कूल शिक्षा विभाग अब पूरे मामले की समीक्षा करने जा रहा है। अधिकारियों से लंबित कोर्ट केस की जानकारी बुलवाई जा रही है। 14 अक्टूबर को शाम 4 बजे मंत्रालय में इसे लेकर समीक्षा की जाएगी।

खासकर वर्ग 1 शिक्षक भर्ती 2018 में EWS नियुक्ति को लेकर सिंगल बेंच के ऑर्डर को डबल बेंच में चैलेंज करने के बाद 2023 की भर्ती जो अटकी है, उसे लेकर चर्चा होनी है।

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