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Manikchandra Vajpayee Jayanti
Manikchandra Vajpayee Jayanti: पत्रकारिता के क्षेत्र में मूल्यों और नैतिकता की नींव रखने वाले माणिकचंद्र वाजपेयी 'मामाजी' की जयंती के अवसर पर विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश द्वारा विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भोपाल स्थित माणिकचंद्र वाजपेयी सभागार में 7 अक्टूबर को संपन्न हुआ। व्याख्यान का विषय था– "मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी और पत्रकारिता का वर्तमान परिदृश्य"।
'पत्रकारों को चरणबद्ध ढंग से गढ़ते थे मामाजी' : गिरीश जोशी
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इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने कहा कि मामाजी सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि पत्रकारों को गढ़ने वाले व्यक्तित्व थे। वे चरणबद्ध तरीके से न केवल पत्रकारिता सिखाते थे, बल्कि जीवन के संस्कार भी देते थे। उपाध्याय ने साझा किया कि कैसे मामाजी ने उन्हें सबसे पहले समाचार पत्र की तकनीकी प्रक्रिया सिखाई और बाद में इंदौर के सांस्कृतिक पर्व अनंत चतुर्दशी के कवरेज की जिम्मेदारी देकर पत्रकारिता के गहरे अनुभव से जोड़ा।
गिरीश उपाध्याय ने कहा, “मैं भोपाल शिक्षक बनने आया था, लेकिन मामाजी के कारण पत्रकार बना। उनकी सोच, उनका मार्गदर्शन, उनकी शैली- सबने मेरी पत्रकारिता को आकार दिया। वे संवाद के माध्यम से जीवन के वास्तविक अर्थ सिखाते थे।”
पत्रकारिता में मूल्यों के ध्वजवाहक थे मामाजी: गिरीश जोशी
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के साथ मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी[/caption]
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मौजूद माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के सहायक कुलसचिव गिरीश जोशी ने कहा कि भारत में पत्रकारिता की आत्मा को बचाने वाले कुछ विरले नामों में मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी अग्रणी थे। उनका लक्ष्य कभी सिर्फ खबर लिखना नहीं था, बल्कि राष्ट्रहित, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता को बढ़ावा देना था।
जोशी ने बताया कि मामाजी ने समाचार पत्र के हर पहलू, जैसे- प्रूफ रीडिंग, कंपोजिंग, लेआउट और संपादन को भी खुद सीखा और सिखाया। उन्होंने आपातकाल से पहले ही अपने संपादकीय में उसके संकेत दे दिए थे, जो उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है। साथ ही, उन्होंने बताया कि मामाजी स्वदेशी आंदोलन के समर्थक थे और उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि "स्वदेशी सिर्फ वस्त्र या वस्तु नहीं, एक विचार है।"
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मामाजी ने पत्रकारिता को दी नैतिक दिशा: लाजपत आहूजा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने कहा कि मामाजी मूलतः भिंड में एक निजी महाविद्यालय का संचालन कर रहे थे, लेकिन नियति ने उन्हें पत्रकारिता में खींच लिया। वे जमीनी हकीकतों को समझने वाले, निस्पृह और मूल्यनिष्ठ पत्रकार थे।
उन्होंने बताया कि मामाजी का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से गहरा संबंध था और अटल जी मामाजी के लेखन और विचारों का अत्यंत सम्मान करते थे। उन्होंने एक प्रसंग साझा किया जब मामाजी ने एक सेक्स स्कैंडल में फंसे नेता की तस्वीर प्रकाशित करने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि समाचार पत्र परिवारों में पढ़ा जाता है और इसकी गरिमा बनी रहनी चाहिए।
विशेषांक 'कन्वर्जन का खेल' का भी हुआ विमोचन
कार्यक्रम के अंत में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही, विश्व संवाद केंद्र के विशेषांक 'कन्वर्जन का खेल: निशाने पर जनजातीय' का विमोचन भी किया गया। इस विशेषांक का संपादन युवा पत्रकार एवं लेखक सुदर्शन व्यास ने किया है। कार्यक्रम का संचालन अदिति रावत ने किया और आभार लोकेन्द्र सिंह, सचिव, विश्व संवाद केंद्र ने प्रकट किया।
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