वैज्ञानिकों की नई खोज: मच्छर के डंक से लगेगी मलेरिया की वैक्सीन! भविष्य की है ये तैयारी

Malaria Vaccine Details मलेरिया कैसे होता है, ये हम सबको पहले से पता है। वैज्ञानिकों ने अब इस समस्या में ही समाधान ढूंढ निकाला है। इसे लेकर वैज्ञानिकों ने नई खोज की है।

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Malaria Vaccine: मलेरिया कैसे होता है, ये हम सबको पहले से पता है। वैज्ञानिकों ने अब इस समस्या में ही समाधान ढूंढ निकाला है। इसे लेकर वैज्ञानिकों ने नई खोज की है।

जिन मच्छारों के काटने की वजह से मलेरिया फैलता है, भविष्य में मच्छरों के डंक से ही मलेरिया की वैक्सीन लगाने की तैयारी है। वैज्ञानिकों ने ऐसी वैक्सीन बना ली है, जो मच्छरों में डाली जा सकती है।

इस वैक्सीन से लैस मच्छर आपको काटेगा तो मलेरिया होगा नहीं बल्कि उससे बचाव मिलेगा। आइये आपको इस पूरी खोज की जानकारी देते हैं।

नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने बनाई वैक्सीन

इस वैक्सीन को नीदरलैंड्स की रैडबाउंड यूनिवर्सिटी और लीडन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाई है। वैक्सीन में प्लासमोडियम फाल्सीपैरम पैरासाइट का कमजोर जेनेटिक वर्जन डाला गया है।

इस GA2 वर्जन पैरासाइट से मलेरिया नहीं होता, बल्कि शरीर में उससे इम्यूनिटी बनती है। जीए2 पैरासाइट अपने पहले वर्जन यानी जीए1 के बजाय लिवर में डेवलप होने में बहुत समय लेता है।

ऐसे में लिवर इससे फाइट करने वाले सिस्टम को एक्टिवेट कर देता है। बस फिर मलेरिया होने का चांस खत्म हो जाता है।

ट्रायल के ​शुरुआती रिजल्ट पॉजीटिव

यह मलेरिया की सेकेंड जेनरेशन वैक्सीन है। इसे लेकर ट्रायल भी किये गए हैं। शुरुआती रिजल्ट काफी पॉजीटिव रहे हैं। जिसके कारण इससे इलाज करना काफी ज्यादा फायदेमंद दिख रहा है।

9 लोगों पर यह वैक्सीन की टेस्टिंग की गई। इसमें से आठ लोग मलेरिया मुक्त साबित हुए। जबकि एक को पुराने जेनरेशन वाली मलेरिया वैक्सीन दी गई थी।

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मच्छरों में भी डाला जा सकता है पैरासाइट

वैक्सीन तैयार करने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो इन पैरासाइट को मच्छरों में भी डाला जा सकता है। ताकि जब ये इंसानों को काटे तब ये पैरासाइट इंसान के शरीर में चला जाए। इससे उसे मलेरिया से बचाव मिलेगा। इस पैरासाइट का जेनेटिक डेवलपमेंट रोक दिया गया है।

इसलिए यह इंसानी खून के जरिए लिवर तक जाकर बीमारी पैदा नहीं कर सकता। अभी यह प्रयोग कुछ समय के लिए इंसान को मलेरिया से बचाता है। भविष्य में इसे और ताकतवर बनाने की तैयारी चल रही है।

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ऐसे फैलता है मलेरिया

मलेरिया एनोफ़िलीज़ प्रजाति के मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर सामान्यत: शाम के वक्त काटता है। मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर, संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद प्लास्मोडियम परजीवी को अपने शरीर में ले लेता है।

जब यह मच्छर किसी दूसरे व्यक्ति को काटता है, तो वह परजीवी उस व्यक्ति के खून में प्रवेश कर जाता है। इस तरह से मलेरिया फैलता जाता है।

मलेरिया को रोकने के लिए, मच्छरों के प्रजनन स्थानों को खत्म करना, ठहरे हुए पानी में लार्वा को मारना, और मच्छरों के काटने से बचना चाहिए। मलेरिया वाले इलाकों में जाने वाले लोगों को मलेरिया रोधी दवाएं लेने की सलाह दी जाती है।

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