Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर नर्मदा-शिप्रा घाटों पर उमड़ी भक्तों भीड़, महाकाल को लगा तिल के लड्डुओं का भोग

Makar Sankranti 2025; Narmada River Snan: मकर संक्रांति 2025 पर शिप्रा और नर्मदा नदी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से पवित्र डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं।

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर नर्मदा-शिप्रा घाटों पर उमड़ी भक्तों भीड़, महाकाल को लगा तिल के लड्डुओं का भोग

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति 2025 पर शिप्रा और नर्मदा नदी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से पवित्र डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। सुबह 6 बजे से ही लोग घाट पर आना शुरू हो गए। स्नान के बाद भक्तों ने दान-पुण्य कर रहे हैं।

कड़ाके की ठंड के बावजूद देशभर से लोग शिप्रा नदी के रामघाट स्नान करने पहुंच रहे हैं। मकर संक्रांति पर बाबा महाकाल को तिल के उबटन से स्नान कराया गया और तिल के बने पकवानों का भोग अर्पित किया गया।

संक्रांति के पर्व पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर होता है। मकर संक्रांति पर हरी मूंग की दाल की खिचड़ी, चावल, वस्त्रों का दान और भोजन का दान आदि वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। वहीं, तिल से स्नान और सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है।

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बाबा महाकाल को तिल का भोग

महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी के अनुसार, मकर संक्रांति पर महाकाल को तिल के तेल से स्नान कराया गया। वहीं, तिल की मिठाईयों का भोग लगाया गया। बाबा महाकाल को गुड़ और शकर से बने तिल के लड्डुओं को भोग लगाकर जलाधारी में तिल अर्पित की गई।

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जबलपुर में बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु

जबलपुर में नर्मदा में बड़ी संख्या में लोग घाट पर स्नान कराने पहुंच रहे हैं। पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। अनुमान के अनुसार, शहर में एक लाख से ज्यादा लोग नर्मदा स्नान करेंगे।

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घाटों का पुख्ता इंतजाम

जबलपुर पुलिस ने भिटोली, ग्वारीघाट, उमाघाट, खारी घाट, तिलवारा घाट, भेड़ाघाट और सरस्वती घाट पर सुरक्षा और व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया। सबसे ज्यादा सुरक्षा ग्वारीघाट में रखी है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और आने-जाने का रास्ता एक है।

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मकर संक्रांति पर महाकुंभ में पहला अमृत स्नान, सबसे पहले निर्वाणी के नागा साधुओं ने लगाई डुबकी

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महाकुंभ 2025 का आज पहला अमृत स्नान है, जिसकी शुरुआत प्रयागराज में पौष पूर्णिमा के दिन भजन-कीर्तन के साथ हुई। मकर संक्रांति के अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के नागा साधुओं ने संगम में पवित्र स्नान किया, जिसे ‘अमृत स्नान’ (शाही स्नान) कहा जाता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...

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