Mahrana Pratap javelin weight :नीरज चोपड़ा के भाले से कितना ज्यादा था महराणा प्रताप के भाले का वजन?

Mahrana Pratap javelin weight

BHOPAL: बचपन से ही आपने महराणा प्रताप से संबंधित एक से बढ़कर एक कहानियां  सुनी होंगी। इसमें कोई भी शंका नहीं है कि उनके जैसा शौर्यवान और साहसी वीर योद्धा इतिहास में एक बार ही जन्म लेता है। लेकिन ऐसे महान योद्धा के बारे में दुनिया अफवाहों पर जिये तो ये उस योद्धा के साथ कोई इंसाफ नहीं होगा। इन अफवाहों का उदाहरण हम ऐसे देख सकते हैं कि आज सोशल मीडिया में कई तरह की पोस्ट्स में तरह-तरह के गलत दावे किये जाते हैं।हालांकि ये राणा की बहादुरी को लेकर उनका प्यार है लेकिन प्यार में सच को छिपाना कोई अच्छी बात नहीं है। आज इस आलेख में हम राणाप्रताप से संबंधित अफवाहों को दूर करने के लिए ये रिसर्च से भरी रिपोर्ट लेकर आये हैं।और इसमें हम बताएंगे कि, आखिरकार कितना था महराणा प्रताप के भाले का वजन ।

सबसे पहले वो दावे जिनमें अफवाह फैलाई जाती है

कई तरह की सोशल मीडिया रिपोर्टस और कई तरह कि अन्य रिपोर्टस में कहा जाता है कि, महराणा प्रताप की छाती के कवच का वजन 72 किलो और उनके भाले का वजन 81 किलो था।और दावा किया जाता है कि वो युद्ध के दौरान लगभग 208 किलो वजन लेकर चलते थे। और कई उनके प्रेमी तो ये तक दावा कर देते हैं कि वो लगभग 5 क्विंटल (लगभग 500 किलो) वजन लेकर चलते थे। लेकिन आपको हम बता दें कि ये उनके सम्मान करने वाले प्रेमियों का उनके प्रति प्रेम है। सच्चाई कुछ और ही है।

सच्चाई क्या है? कितना था राणा के भाले का वजन

आपको बता दें कि राणा के भाले के वजन की जानकारी हमें उनके उदयपुर में बने सिटी पैलेस म्यूजियम में रखे उनके ही भाले से ही मिलती है। यहां इस विषय में पूरी जानकारी भी लिखी गई है और इस जानकारी में बताया गया है कि राणा प्रताप के भाले का वजन लगभग 17 किलो था और वो जब युद्ध में लड़ने जाते थे तब उनके कवच तलवार और उनके ल़ड़ाई के साजो सामान का वजन लगभग 35 किलो था।

नीरज चोपड़ा के भाले का वजन

नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक के लिए जो भाला फेंका था उसका वजन लगभग 800ग्राम था। यानी नीरज चोपड़ा के भाले से राणा प्रताप का भाला 20 गुना ज्यादा वजनी था ।ये कोई छोटी बात नहीं  है। इसी से राणा के शौर्य का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इसमें कोई भी शंका नहीं है कि राणा जब 35 किलो का कुल वजन लेकर आंधी की तरह युद्ध करते थे तब दुश्मनों का पसीना छूट जाता था।और आज उन्हें उनके इसी शौर्य और साहस के लिए याद किया जाता है।

उम्मीद है आलेख पसंद आया होगा इसको शेयर करना न भूलें…..धन्यवाद…जय हिंद

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