Ujjain Mahakaleshwar Temple: बाबा महाकाल बने दूल्हा, सजा तीन क्विंटल फूलों से बना सेहरा, 101 लीटर दूध से हुआ महाभिषेक

Mahashivratri Ujjain Mahakaleshwar Temple Update सेहरा दर्शन के बाद भस्म आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद भोग आरती हुई और शिव नवरात्रि का पारणा किया गया।

Ujjain Mahakaleshwar Temple: बाबा महाकाल बने दूल्हा, सजा तीन क्विंटल फूलों से बना सेहरा, 101 लीटर दूध से हुआ महाभिषेक

महाकाल को चढ़ा सेहरा।

Ujjain Mahakaleshwar Temple: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भव्य आयोजन हुआ। गुरुवार को भगवान महाकाल को साल में एक बार धारण किया जाने वाला सवा मन का पुष्प मुकुट (सेहरा) पहनाया गया। सेहरा दर्शन के बाद भस्म आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद भोग आरती हुई और शिव नवरात्रि का पारणा किया गया।

महाअभिषेक और सप्तधान्य अर्पण

बुधवार की मध्यरात्रि 11 बजे से गुरुवार सुबह तक भगवान महाकालेश्वर की चार प्रहर की महाअभिषेक पूजा की गई। इस दौरान 101 लीटर दूध, दही, शक्कर, शहद, घी, फलों का रस, गन्ने का रस, गंगाजल, गुलाब जल, भांग और केसर मिश्रित दूध से महाभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान को जल से स्नान कराया गया।

महाभिषेक के बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाए गए और सप्तधान्य से उनका मुख मंडल सजाया गया। इसमें 31 किलो चावल, 11-11 किलो मूंग, तिल, मसूर, जौ, गेहूं, साल और उड़द अर्पित किए गए।

सवा लाख बिल्वपत्र और फूलों का श्रृंगार

सप्तधान्य अर्पण के बाद भगवान को सेहरा चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें विभिन्न प्रकार के फूलों की लड़ियां, आंकड़े के फूल और पुष्पों की मोटी मालाएं चढ़ाई गईं। भगवान को सवा लाख बिल्वपत्र अर्पित किए गए।

इसके बाद स्वर्ण और रजत आभूषण, छत्र, चंद्र मुकुट और त्रिपुंड अर्पित किए गए। मंदिर समिति की ओर से भगवान को चांदी का एक सिक्का और चांदी का एक बिल्वपत्र भी चढ़ाया गया।

भस्म आरती और भोग आरती

गुरुवार सुबह 11 बजे बाबा महाकाल का सेहरा उतारा गया। भगवान के आभूषण, मुखारविंद और वस्त्र बाहर निकालने के बाद दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक भस्म आरती का आयोजन किया गया। इसके आधे घंटे बाद दोपहर 2:30 बजे से 3 बजे तक भोग आरती हुई।

ब्राह्मण भोजन और संध्या पूजन

भोग आरती के बाद ब्राह्मण भोजन का आयोजन नवनिर्मित श्री महाकालेश्वर निशुल्क अन्नक्षेत्र में किया गया। भोजन के बाद ब्राह्मणों को दक्षिणा प्रदान की गई। शनिवार को संध्या पूजन सांय 5 बजे से 5:45 बजे तक होगी। इसके बाद संध्या आरती 6:30 से 7:15 बजे तक होगी। रात 10:30 बजे शयन आरती और रात 11 बजे भगवान के पट मंगल होंगे।

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